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निदा से तलाक के झगड़े में शीरान की हजयात्रा रद्द

Sun, 07 May 2017 12:52 AM IST
बरेली। 
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निदा से तलाक के झगड़े में शीरान की हजयात्रा रद्द - फोटो : निदा से तलाक के झगड़े में शीरान की हजयात्रा रद्द
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तीन तलाक को लेकर विवादों में आए आला हजरत खानदान के मोहम्मद शीरान रजा खां को अपनी हजयात्रा रद्द करनी पड़ी है। उनका नाम कुरा के बाद हजयात्रा पर जाने वालों की पहली सूची में शामिल था लेकिन पत्नी निदा से तलाक और अन्य मामलों में चल रहे झगड़े की वजह से उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। अब वह इस साल हजयात्रा पर नहीं जाएंगे। आला हजरत खानदान की बहू निदा खान से पति शीरान रजा खां का विवाद कुछ माह पहले ही सुर्खियों में आया। निदा ने आरोप पति पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उनके पति शीरान रजा खां का कहना था कि उन्होंने निदा खान को तलाक दे दिया जबकि निदा इस तलाक को मानने को तैयार नहीं थीं और मामला शरई अदालत से लेकर कोर्ट में गूंजने लगा। कुछ माह से यह मामला और गरमा गया है जबसे निदा ने शीरान पर धमकी देने और हमला करने जैसे आरोप लगाए हैं। इसी बीच तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को लेकर निदा खान ने तीन तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद की। रोज के बदलते घटनाक्रम से परेशान शीरान रजा खां भी अब इस मामले में घिरे हुए हैं। उन्होंने इस साल हजयात्रा पर जाने का मन बनाया था और फार्म भरा था। जिसके आधार पर 21 मार्च को उत्तर प्रदेश की हज कमेटी की ओर से जारी हुई लिस्ट में उनका नाम शामिल था। उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी थी लेकिन जब यह विवाद और मुकदमे सामने आए तो उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा। दरअसल हजयात्रा पर जाने में कम से कम डेढ़ माह का वक्त लगता है और इस मामले पर रोज ही बयान और तारीख पड़ रही हैं। हालातों को देखते हुए उन्होंने किराये का शुल्क जमा नहीं किया और कागजी काम जो जरूरी थे उन्हें नहीं किया। 
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सालों से मन में हज यात्रा पर जाने का इरादा है। मैंने तो हज यात्रा के लिए इस बार फार्म भी भरा था और पहली ही सूची में नाम भी आ गया था। कवर नंबर भी मिल गया, मगर यहां पत्नी की ओर से आए दिन कोई न कोई आरोप, नई-नई बातों पर बखेड़ा। हालात को देखते हुए हजयात्रा पर नहीं जा रहा।
- मोहम्मद शीरान रजा खां, सौदागरान
क्या करें बेटे शीरान को हज पर भेजना तो चाह रहे थे, मगर यहां हालात ऐसे हैं आए दिन नए-नए आरोप, अदालतों की तारीखें, उसमें भी पहुंचना जरूरी है। लगा कि हज पर भेजा तो वक्त ज्यादा लग जाएगा। इसलिए इस बार कार्यक्रम को आइंदा सालों के लिए बदलना ही मुनासिब समझा। 
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- मौलाना अंजुम रजा खां (पिता शेरान रजा)   
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