वेतन भुगतान समेत कई मांगों को लेकर पिछले नौ दिन से धरना-प्रदर्शन कर रहे पावर कॉरपोरेशन के संविदा मीटर रीडरों का शनिवार को धैर्य जवाब दे गया। शनिवार दोपहर नौ मीटर रीडर टाउनहॉल में नगर निगम दफ्तर के सामने शहीद द्वार मैदान स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए और जमकर हंगामा किया। सिटी मजिस्ट्रेट के मांगें पूरी कराने के आश्वासन पर करीब दो घंटे बाद नीचे उतरे।
पावर कॉरपोरेशन ने मीटर रीडिंग के लिए विशाखापट्टनम की एक कंपनी से अनुबंध करके संविदा पर कर्मचारी तैनात किए हैं। जिले में 450 संविदा मीटर रीडर हैं, जो विभिन्न बिजली उपकेंद्रों पर तैनात हैं। मीटर रीडरों के मुताबिक उन्हें जनवरी से वेतन नहीं मिला है। विभाग से जुड़ी अन्य कई समस्याएं हैं, जिनके संबंध में कोई सुनने वाला नहीं है। बकाया वेतन के भुगतान समेत कई मांगों को लेकर संविदा मीटर रीडर एक अप्रैल से कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
इस बीच, अधीक्षण अभियंता ने दो माह (जनवरी, फरवरी) का मानदेय स्वीकृत किया था, लेकिन मीटर रीडरों के बैंक खातों में धनराशि नहीं पहुंची। दो दिन पहले यूनियन के पदाधिकारी सहायक श्रमायुक्त वीरेंद्र कुमार से मिले थे। उन्होंने नियोक्ता कंपनी के प्रतिनिधि विकास श्रीवास्तव को वार्ता के लिए बुलाया था, लेकिन वह नहीं पहुंचे।
सहायक श्रमायुक्त ने 14 अप्रैल को द्विपक्षीय वार्ता की तिथि निर्धारित की थी। मगर इससे पहले सुपरवाइजर शिवम मिश्रा की संविदा समाप्त कर दी गई। बाकी मीटर रीडरों पर त्यागपत्र देने का दबाव बनाया जाने लगा।
इसके विरोध में यूनियन के महामंत्री आशीष कुमार संविदा मीटर रीडरों को लेकर शनिवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे शहीद द्वार मैदान पहुंचे। उस वक्त नगर निगम कर्मी परशुराम अहाते में लगे नलकूप की मशीनरी में ग्रीसिंग कर रहा था।
आरोप है कि निगम कर्मी से मीटर रीडरों ने चाबी छीन ली और गेट का ताला खोलकर टंकी पर चढ़ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पवन मिश्रा कुछ मीटर रीडरों के साथ टंकी के नीचे दरी डालकर धरने पर बैठ गए।
इसके बाद टंकी के ऊपर और नीचे दोनों तरफ नारेबाजी होने लगी। इसका पता लगने पर सदर बाजार कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई और अधिकारियों को सूचना दी। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी मौके पर जा पहुंचे। अफसरों को देखकर मीटर रीडरों ने नारेबाजी तेज कर दी।