आला हजरत खानदान की बहू निदा खान और शीरान के बीच तलाक हुआ या नहीं यह सवाल अभी पेचीदा बना हुआ। कोर्ट में दाखिल तलाकनामा हालांकि कानूनी नजरिए से साफ नहीं है लेकिन शरीयन इसे तलाक माना जा सकता है। शहर काजी के सामने निदा के दुबारा पेश न होने से उनका फैसला अभी नहीं आया है।
निदा और शीरान की शादी 18 फरवरी 2015 को हुई। कुछ महीने बाद दोनों में विवाद शुरू हो गया। आरोप प्रत्यारोप का दौर चला। मामला बढ़ा तो निदा थाने पहुंची और रिपोर्ट दर्ज न होने पर उसने अदालत का सहारा लिया। अदालत में एक तलाकनामा शीरान को ओर से दाखिल है जिसे निदा फर्जी बता रही हैं। हालांकि शीरान ने अखबार को दिए बयान में कहा है कि उसने निदा को तलाक दे दिया है और निदा के घर पर दोनों परिवारों की सहमति से हुआ है। वहीं इसके विपरीत निदा का कहना है कि यह गलत है। शीरान ने कब और कहां तलाक दिया उसे नहीं पता। अदालत में दाखिल तलाकनामा इकतरफा है। उसमें सिर्फ शीरान और उन्हीं के दो गवाहों के हस्ताक्षर हैं। उनकी ओर से कोई हस्ताक्षर न मेरे और न ही गवाहों के है। तो फिर रजामंदी से कैसे तलाक हुआ। यह तलाकनामा भी वह प्रेस को दिखा चुकीं हैं।
तलाक साबित करना होगा
वरिष्ठ अधिवक्ता मलका मैरी का कहना है कि अगर अदालत में तलाकनामा दाखिल किया गया है तो उसे साबित करना पड़ेगा। गवाह बताएंगे कि उस वक्त पत्नी मौजूद थी या नहीं। खाली कागज पर तलाक दे देना और अपने ही गवाहों के हस्ताक्षर कर देना, यह तलाक अदालत में मान्य नहीं होगा। अगर लिखित में भी तलाक दिया है तो पत्नी को तामील कराना जरूरी है।