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किस्मत के दुष्चक्र में फंसी नवजातः अचानक उखड़ीं सांसें.. एक बार फिर जिंदगी के लिए जंग

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अस्पताल में भर्ती सरसों के खेत में फेंकी गई बच्ची। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सरसों के खेत में नंगे बदन फेंकी गई नवजात बच्ची को हुआ निमोनिया, खून में संक्रमण भी
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जिला अस्पताल वालों ने खड़े किए हाथ, निजी अस्पताल ने ली मुफ्त इलाज की जिम्मेदारी

बरेली। जन्म देने वालों के हाथों ही मरने के लिए सरसों के खेत में नंगे बदन फेंकी गई नवजात अपराजिता घंटों कड़ाके की ठंड का सामना कर जिंदगी की पहली जंग तो जीत ली लेकिन नियति ने 24 घंटे बाद ही उसे एक और परीक्षा के मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया। निमोनिया होने के बाद एक बार फिर वह जिंदगी के लिए जूझ रही है। बुधवार दोपहर अचानक उसकी हालत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में उसका इलाज कर पाना संभव नहीं रहा तो उसे एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जिला अस्पताल की सिक न्यू वार्न केयर यूनिट में भर्ती नवजात बच्ची की सांसें दोपहर के वक्त अचानक थमने लगीं। जांच में उसकी हालत गंभीर पाई गई। डॉक्टरों की कोशिश के बाद जैसे-तैसे उसकी सांसें तो बहाल हो गईं लेकिन इलाज की पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण उसकी जान बचा पाना मुश्किल था। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बच्ची की हालत नाजुक देख बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. डीएन शर्मा को खबर की। डॉ. शर्मा ने उसे हायर सेंटर रेफर करने को कहा तो बताया गया कि हायर सेंटर अलीगढ़ और लखनऊ में हैं। बच्ची की हालत इस लायक नहीं है कि उसे लखनऊ या अलीगढ़ ले जाया जा सके। उसे फौरन वेंटिलेटर सपोर्ट भी चाहिए जो जिला अस्पताल में नहीं है।
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डॉक्टरों का सुझाव था कि मासूम की जान बचाने के लिए उसे किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराने का एक ही विकल्प है लेकिन मुश्किल यह है कि ऐसी स्थिति में उसके इलाज का खर्च कौन उठाएगा। इसके बाद शहर के कई डॉक्टरों से बातचीत की गई। रामपुर बाग के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि खन्ना ने न सिर्फ बच्ची का मुफ्त इलाज करने की हामी भरी बल्कि फौरन ही एंबुलेंस और स्टाफ को भेजकर उसे अपने अस्पताल मंगवाकर भर्ती भी करा दिया।

निमोनिया के साथ ब्लड इन्फेक्शन भी बच्ची की हालत नाजुक: डॉ. खन्ना

बाल रोग विशेष डॉ. रवि खन्ना ने बताया कि बच्ची को निमोनिया होने के साथ ब्लड में इन्फेक्शन भी है। उसकी प्लेटलेट्स 50 हजार हैं जो डेढ़ से साढ़े चार लाख होनी चाहिए थीं। ब्लड प्रेशर भी गिरा हुआ है। उसकी हालत नाजुक है और उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है। दो किलो चार सौ ग्राम की बच्ची को वेंटिलेटर पर रखा गया है। उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

बच्ची की जान बचाना पहला मकसद

बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. डीएन शर्मा ने बताया कि नियमानुसार बच्ची का इलाज सरकारी अस्पताल या हायर सेंटर में ही हो सकता है लेकिन उसकी जान बचाने के लिए उन्होंने प्राइवेट चिकित्सक से इलाज कराने की अनुमति दे दी। बोले- पहला मकसद यह है कि किसी भी तरह बच्ची की जान बचाई जाए।
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