इन मामलों में फील्ड यूनिट मौके पर जाएगी
इसके अलावा जरूरत के मुताबिक सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) में बदलाव किया जा चुका है। मुकदमे की धाराएं लगते ही सीसीटीएनएस सीधे थाना प्रभारियों के मोबाइल पर उस धारा से संबंधित जानकारियों को मैसेज कर देगा। मसलन, दस साल से ज्यादा सजा के प्रत्येक मामले में अब फील्ड यूनिट मौके पर जाएगी।
नए कानून के तहत दस साल से ज्यादा सजा की धारा में जैसे ही कोई मुकदमा दर्ज होगा। सीसीटीएनएस से सीधे संबंधित थाना प्रभारी को मौके पर फील्ड यूनिट भेजने का मेसेज स्वत: जारी हो जाएगा। नए कानून के मामले में एसपी ट्रैफिक शिवराज को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
नए कानून में पीड़ित को किया गया परिभाषित
नए कानून के संबंध में बनाए गए नोडल अधिकारी शिवराज ने बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में पीड़ित शब्द को भी परिभाषित किया गया है। पुराने कानून में केवल पीड़ित उसी को माना जाता था जिसके साथ घटना कारित की गई हो। लेकिन अब नए कानून में जिसके साथ घटना हुई है वह व्यक्ति, उसका परिवार या मां-बाप भी पीड़ित माने जाएंगे। एफआईआर इनमें से किसी की भी तरफ से दर्ज कराई जा सकती है।
मोबाइल को मिली कानूनी मान्यता, होगी हर गतिविधि की रिकार्डिंग
नोडल अधिकारी शिवराज ने बताया कि नए कानून के तहत मोबाइल को एक तरह से मान्यता दे दी गई है। मोबाइल से की गई वीडियोग्राफी को कानून व्यवस्था में शामिल कर लिया है। अब घटना होने के बाद घटना स्थल की वीडियोग्राफी की जाएगी। इसके अलावा गिरफ्तारी, बयान, बरामदगी, सर्च अभियान आदि सबकी वीडियोग्राफी होगी। अगर कोई व्यक्ति थाने में घायल अवस्था में आया है तो उसकी भी वीडियोग्राफी होगी।
मोबाइल से बनाया गया उसका वीडियो अब मान्य होगा। इसके अलावा अब गिरफ्तारी के समय आरोपी के रिश्तेदार का मोबाइल नंबर भी दर्ज किया जाएगा। गिरफ्तारी के बाद सीधे आरोपी के रिश्तेदार के नंबर पर गिरफ्तारी का संदेश भेजा जा सकेगा। अदालत में भी उसे बताना होगा कि मुकदमे में क्या-क्या इलेक्ट्रानिक सुबूत हैं।
व्हाट्सएप और टेलीग्राम, मेल से भी दर्ज हो सकेगी एफआईआर
नए कानून के तहत अब देश में कहीं भी एफआईआर दर्ज हो सकेगी। साफ्टवेयर को इस तरह से तैयार किया गया है कि दर्ज एफआईआर घटना स्थल के आधार पर खुद संबंधित थाने में ट्रांसफर हो जाएगी। जहां से मुकदमे की विवेचना होगी उसी थाने से एफआईआर नंबर दर्ज होगा।
खास बात यह भी है कि अगर पीड़ित ऐसी परिस्थिति में है कि वह थाने नहीं पहुंच पा रहा है तो व्हाटसएप, टेलीग्राम व मेल के जरिए भी तहरीर भेजकर एफआईआर दर्ज करा सकता है। एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित के मोबाइल नंबर पर ही एफआईआर की व्हाट्सअप कॉपी भेज दी जाएगी।
हत्या, दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों में हथकड़ी पहनकर अदालत जाएंगे बंदी
अभी तक बंदियों को अदालत में पेश करते समय हाथ में हथकड़ी नहीं लगा सकते थे। अगर किसी बंदी को हथकड़ी लगानी है तो पहले अदालत से इजाजत लेनी पड़ती थी। इसका फायदा उठाकर कई बार बंदी अदालतों तक से फरार हो जाते थे।
अब नए कानून के तहत हत्या, दुष्कर्म, एसिड अटैक, बच्चों के यौन शोषण, मानव तस्करी, एनडीपीएस के मामले में पकड़े गए अपराधियों को हथकड़ी लगाकर अदालत में पेश किया जाएगा। इसके अलावा जो बंदी पूर्व में हिरासत से भाग चुका है तो उसे भी हथकड़ी लगाकर अदालत में पेश किया जाएगा।
नाबालिग से दुष्कर्म पर अब मृत्युदंड की सजा
जिले में नाबालिग से दुष्कर्म के सैकड़ों मुकदमे अदालत में चल रहे हैं। इन मामलों में अभी तक 20 साल या आजीवन सजा का प्रावधान था। लेकिन अब इसमें आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है।