बरेली। बारिश सिर पर है पर अब तक न तो नालों से कब्जे हटे हैं और न ही सफाई हो सकी है। सोमवार को हुई जरा सी बारिश में जलभराव के कारण कई इलाकों में घर से निकलना दुश्वार हो गया। जब मंगलवार को पड़ताल की गई तो प्रमुख नालों की हालत वैसी ही मिली जैसी महीने भर पहले थी। सफाई अभियान सेटेलाइट बस अड्डे और चौपुला के नाले तक भी नहीं पहुंच सका था।
सेटेलाइट बस अड्डे के एक हिस्से में नाले का गंदा पानी मंगलवार को भी जमा मिला। नाला चोक था। सेटेलाइट बस अड्डे ही नहीं कई और इलाकों में भी नाले बंद मिले।
पड़ताल की तो नगर निगम कार्यालय के सामने एलन सब्जी मंडी के निकट प्रमुख नाला चोक मिला तो चौपुला चौराहे के नाले पर अवैध कब्जे से सफाई बाधित मिली। सतीपुर चौराहे पर अतिक्रमण ने सफाई रोक दी थी। यही हाल सिकलापुर का था। नाले पर पक्का निर्माण मिला।
तली झाड़ सफाई का अभियान अधूरा था। कई बड़े नालों में तो सफाई शुरू नहीं होने की बात सामने आई। अब जबकि मानसून सिर पर है यदि सफाई की रफ्तार ऐसी ही रही तो 15 जून तक सभी नालों की तली झाड़ सफाई पूरी नहीं हो सकेगी। ब्यूरो
एक नजर में
226 छोटे-बड़े नाले
217 किलोमीटर ड्रेनेज नेटवर्क
30 बड़े नाले
बारिश से पहले तली झाड़ सफाई होगी पूरी
सफाई और नालों से अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू हो गया है। हर रोज कहीं न कहीं कब्जे हटाए जा रहे हैं। इस अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई है। अगर कहीं कोई लापरवाही होती है तो कार्रवाई होगी। बारिश शुरू होने से पहले ही नालों की सफाई पूरी कराई जाएगी। अन्य वार्डों के साथ-साथ सिकलापुर के कब्जे भी चिह्नित किए गए हैं। अगर कहीं अवैध कब्जे से जुड़े मामले अदालत में हैं तो उनमें भी पैरवी होगी। जल्दी से जल्दी कब्जे हटाए जाएंगे।
-संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त
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नागरिकों की बात
जरूरत वाले इलाकों में बजट का टोटा है। जहां जरूरत है वहां काम नहीं हो रहे। जलभराव से कई इलाकों का हाल खराब है।
-विनय शर्मा, दुर्गानगर
शहर के कई हिस्सों में जलभराव के हालात हैं। बारिश में क्या हाल होगा, आप समझ सकते हैं।
- निवास यादव, कुंवरपुर
नाला निर्माण के लिए बजट नहीं
वीरसावरकर नगर और सौ फुटा रोड से पीलीभीत रोड स्थित नकटिया नदी की ओर दो बड़े नाले नालों के निर्माण के लिए 64 करोड़ का प्रस्ताव बना था। जल निगम की कंस्ट्रक्शन एवं डिजाइन सर्विसेज के प्रस्ताव पर बजट नहीं मिला। ऐसे में अब डेलापीर, कुर्मांचलनगर, सौ फुटा रोड, मुंशीनगर, सैदुपर हाकिंस क्षेत्र में बारिश के दिनों में जलभराव का सामना करना पड़ेगा।
साल दर साल ऐसे बिगड़े हालात
साल-दर-साल सड़कों और नालियों का निर्माण करोड़ों रुपये खर्चकर किया गया लेकिन ड्रेनेज सिस्टम को लेकर न तो कोई सर्वे हुआ और न ही निर्माण के दौरान ढलान का ध्यान रखा गया। नतीजा एक सड़क बनी तो पड़ोस की सड़क निचले स्तर पर हो गई। ऐसे में वहां पर जलभराव होने लगा। इस स्थिति को देखते हुए अब शासन स्तर से कहा गया है कि पहले पूरे शहर का ड्रेनेज सिस्टम बनाने के लिए सर्वेक्षण कराएं। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर नाले और नालियों का नेटवर्क बनाया जाए ताकि समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
सुभाषनगर पुलिया के एक ओर हुई सफाई, दूसरी ओर नाला पटा पड़ा
सुभाषनगर पुलिया में सिविल लाइंस की ओर नाले की सफाई की गई लेकिन सुभाषनगर की एक ओर नाला गंदगी से पटा पड़ा रहा। इधर, सेटेलाइट से पहले नाले की सफाई के लिए एक टीम पहुंची लेकिन पूरा नाला साफ नहीं हुआ। इसलिए आसपास के लोगों के लिए जलभराव का खतरा बना हुआ है। लोगों का कहना था कि सफाई का अभियान महीने भर पहले शुरू होता तो यह हाल न होता।