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देशद्रोह की धारा पर नेहरू जी ने संसद में उठाया था सवाल

Sat, 27 Feb 2016 01:39 AM IST
बरेली
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पद्मश्री डॉ. प्रीतम सिंह से बातचीत
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परपजलेस फ्रीडम ऑफ स्पीच का कोई मतलब नहीं
बरेली। नरेंद्र मोदी जी डेवलपमेंट के नाम पर सत्ता में आए। अब वह इसे भूल गए। वह आरएसएस के एजेंडे पर चल पड़े हैं और आरएसएस धर्म के एजेंडे पर चल रहा है। आरएसएस से देश की आर्थिक प्रगति नहीं हो सकती। किसी भी विचारधारा का समर्थन करना गलत है। इस समय आरएसएस बनाम कम्युनिस्ट चल रहा है। कम्युनिस्ट कौम को नष्ट करते हैं और विचारधारा में विश्वास रखने वाले आरएसएस के प्रचारक आंख बंद रखते हैं। यह कहना है गुड़गांव स्थित लीड सेंटर के सीईओ एवं आईआईएम लखनऊ के पूर्व निदेशक पद्मश्री डॉ. प्रीतम सिंह का। वह देश की मौजूदा परिस्थितियों पर चर्चा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारत में 19 करोड़ मुसलमान हैं, उन्हें कहां भेजेंगे। एक पाकिस्तान बना चुके, अब क्या दूसरा पाकिस्तान बनाएंगे। कम से कम आरएसएस वालों को यह बात समझनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जूएनयू में जो हुआ बहुत गलत हुआ। ये सब साइकोलॉजिकल सिक हैं। बिना अकाउंटेबिलिटी के राइट का कोई मतलब नहीं है। परपजलेस फ्रीडम ऑफ स्पीच का कोई मतलब नहीं है।
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मैनेजमेंट एजूकेशन पर उन्होंने कहा कि हम दूसरों को फॉलो करने में लगे हैं। हम हॉवर्ड को फॉलो करते हैं। इससे इन्नोवेशन की क्षमता डेवलप ही नहीं हो पा रही। हम हर विषय में दूसरे देशों के सिलेबस को लाने में लगे हुए हैं, क्यों न हम लीडरशिप की क्वालिटी डेवलप करें। सारी दुनिया गांधी के बारे में पढ़ती है, हमारे यहां गांधी के बारे में नहीं पढ़ाया जाता।

एलबीएस के दीक्षांत समारोह में डॉ. प्रीतम सिंह ने कहा
शिक्षा खत्म होने के बाद शुरू होती है दीक्षा
तीन मेधावियों को गोल्ड और तीन को मिला सिल्वर
बरेली। लाल बहादुर शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित दीक्षांत समारोह में पीजीडीएम 2011-13, 2012-14 और 2013-15 के विद्यार्थियों को डिप्लोमा के टॉपर्स को मेडल और प्रमाण पत्र दिए। प्रमाण पत्र पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि गुड़गांव स्थित लीड सेंटर के सीईओ पद्मश्री डॉ. प्रीतम सिंह, संस्थान के निदेशक प्रो. राजेंद्र भारती, चेयरमैन अनिल शास्त्री ने मेधावियों को मेडल और प्रमाण पत्र दिए। मुख्य अतिथि डा. प्रीतम सिंह ने बच्चों को जिंदगी का फलसफा समझाते हुए कहा कि दूसरों के लिए जीने वाले कभी नहीं मरते। जब शिक्षा खत्म होती है तो दीक्षा शुरू हो जाती है।
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 समारोह में पीजीडीएम वर्ष 2011-13 में पायल गुलाटी को गोल्ड मेडल, आंचल अग्रवाल को सिल्वर, 2012-14 के लिए राघव बाबू को गोल्ड, मोहित सिल्वर को, 2013-15 के लिए हर्शी अग्रवाल को गोल्ड और दिव्याप्रीत को सिल्वर मेडल दिया गया। अनिल शास्त्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे दुनिया में कहीं भी जाएं अपने संस्थान का नाम रोशन करें। उन्होंने विद्यार्थियों को लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों पर चलने की शपथ दिलाई। संस्थान के निदेशक प्रो. राजेंद्र भारती ने बताया कि एलबीएसआईएमटी भविष्य में मूल्यों पर आधारित शिक्षा और शोध के क्षेत्र के लिए जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं में छिपी प्रतिभाओं को बाहर लाकर उन्हें सफल प्रोफेशनल बनाना ही संस्थान का मिशन है। संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. संजीव श्रीवास्तव ने डॉ. प्रीतम सिंह को स्मृति चिह्न दिया। इस मौके पर मंजू शास्त्री, डॉ. जीएल शर्मा, डॉ. राजकमल श्रीवास्तव, ब्रिगेडियर सीमर भदौरिया, मोबीन खान, उषा उप्पल, राजेंद्र अग्रवाल, शुबोध चट्टोपाध्याय, स्वाति गुप्ता, उपासना गुप्ता, अभिनव नाथ, नितेश सक्सेना, तनिमा सोनी, रितिका गुलाटी, डॉ. नदीम फातिमा, अंकुश सक्सेना, विवेक गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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