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लापरवाही: सरकारी अस्पतालों में चल रहा रेफर का खेल, कहीं थम न जाएं बच्चों की सांसें

Sun, 11 Feb 2024 12:28 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

शुक्रवार को बेहद गंभीर हालत में एक बच्ची को पीलीभीत जिला अस्पताल से बरेली जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती करने के लिए रेफर किया गया। बच्ची की हालत इस कदर नाजुक थी कि उसके बचने की उम्मीद बेहद कम थी। उसे देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए। 
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पीलीभीत से रेफर बच्ची को बच्चा वार्ड में भर्ती कराने पहुंचे अभिभावक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में गंभीर मरीजों का जीवन बचाने के बजाय जिम्मेदार उनकी जान को खतरे में डाल रहे हैं। हालात यह हैं कि तत्काल वेंटिलेटर, विशेषज्ञ की निगरानी की जरूरत के बावजूद बच्चों को भी रेफर कर दिया जा रहा है। आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं।

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शुक्रवार को बेहद गंभीर हालत में एक बच्ची को पीलीभीत जिला अस्पताल से बरेली जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में भर्ती करने के लिए रेफर किया गया। बच्ची की हालत इस कदर नाजुक थी कि उसके बचने की उम्मीद बेहद कम थी। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र ने बच्ची को देखा तो हैरान रह गए। 

जांच कराई तो पता चला कि पल्स रेट 42, ब्लड शुगर 726, एसजीपीटी 301, सीरम लेवल 1232 से ज्यादा है। बच्ची की सांसें अटक रहीं थीं। अभिभावक बदहवास थे। रिपोर्ट देखते ही तत्काल उसे एंबुलेंस से सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा।
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डॉ. करमेंद्र के मुताबिक पीलीभीत जिला अस्पताल से सीधे बच्ची को केजीएमयू या सैफई मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर सकते थे। यहां जिला अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं हैं, इसकी जानकारी के बावजूद बच्ची को रेफर कर दिया। प्रकरण की जानकारी एडी एसआईसी को देते हुए संज्ञान लेने के लिए कहा।

जिला अस्पताल में आए दिन करीब दर्जन भर मरीज बदायूं, शाहजहांपुर, पीलीभीत से रेफर होकर पहुंचते हैं। इनमें भी 50 फीसदी मरीज पीलीभीत से होते हैं। एडी एसआईसी डॉ. अलका शर्मा के मुताबिक रेफर केस पहुंचने पर उन्हें भर्ती करना पड़ता है। बेड फुल होने पर बरेली के मरीजों को रेफर करने की नौबत भी आ जाती है। एडी हेल्थ को पत्र भेजकर उन्होंने रेफर पर अंकुश लगाने को कहा है।

पहले दे चुके हैं विशेषज्ञ न होने की सूचना
पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं को पहले ही एडी एसआईसी स्तर से सूचना दी जा चुकी है कि यहां जिला अस्पताल में नेफ्रोलाजिस्ट, काॅर्डियोलाजिस्ट समेत अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। वेंटिलेटर सुविधा भी मौजूद नहीं है। लिहाजा, इनसे संबंधित मरीजों को सीधे लखनऊ रेफर करें। इसके बाद भी ऐसे मरीजों को बरेली जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
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केस 1 
बदायूं के दातागंज निवासी मजहर हुसैन की दस वर्षीय बेटी सबेनूर को सप्ताहभर पहले जिला अस्पताल बरेली रेफर किया गया था। मजहर के मुताबिक बदायूं जिला अस्पताल से जब रेफर कर रहे थे तो मेडिकल कॉलेज भेजने की मांग स्टाफ ने नहीं सुनी थी। जांच में दिमाग संबंधी गंभीर बीमारी पता चलने पर हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

केस 2
बीते माह हृदय संबंधी समस्या से ग्रसित एक मरीज सुबह पीलीभीत से रेफर होकर बरेली पहुंचा। इमरजेंसी में प्राथमिक इलाज किया गया। डॉक्टर ने तीमारदारों को बताया कि यहां दिल संबंधी बीमारी के इलाज के लिए कोई डॉक्टर नहीं हैं। हालत अधिक गंभीर है। फौरन मरीज को यहां से हायर सेंटर के लिए रेफर किया गया।
 
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