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कालीबाड़ी में विराजी हैं मां काली

Thu, 26 Mar 2015 01:25 AM IST
बरेली
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कालीबाड़ी का प्राचीन कालीदेवी मंदिर दूर-दूर तक मशहूर है। यहां लगने वाले मेले में कोलकाता तक से लोग आते हैं। प्रत्येक सोमवार और शनिवार को भक्तों का रेला लगता है। इस मंदिर की स्थापना दो सौ वर्ष पहले बंगाल से आए एक बाबा ने गोबर की प्रतिमा स्थापित करके कराई थी। मंदिर की व्यवस्था श्री काली देवी मंदिर प्रबंधक कमेटी देखती है। वर्ष 1965 से मंदिर की देखरेख कर रहे कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार बताते हैं कि वर्ष 1941 में एक भक्त ने पूरी तरह से काले पत्थर से बनी काली मां की प्रतिमा स्थापित कराई। मंदिर में सभी प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की ओर से ही स्थापित कराई गई हैं। मुख्य पुजारी गिरीश गौड़ ने बताया कि  मां काली का मुख्य भोग नारियल है। मंदिर में मां काली के अलावा लक्ष्मी जी, मां दुर्गा, संतोषी मां, वैष्णो मां, राम-सीता, शंकर जी, राधा-कृष्णा और भैरव बाबा विराजमान हैं। मंदिर की कमेटी की ओर से गरीब परिवार की कन्याओं की शादी में भी योगदान दिया जाता है।
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शक्ति स्वरूपा आर्यका
संघ लोक सेवा आयोग से अखिल भारतीय रेल सेवा में चयन हो गया था लेकिन आर्यका अखौरी ने भारतीय प्रशासनिक सेना में आने का जो सपना देखा था, उस लक्ष्य को हासिल करके ही दिखाया। वर्ष 2013 में आईएएस क्वालीफाई कर लिया। बरेली में प्रशिक्षण पर आईं आर्यका इस समय आंवला में एसडीएम हैं। उन्होंने अपने हौसले और लक्ष्य को हासिल करने के जज्बे से जो चाहा वह पाकर दिखा दिया। वह कहती हैं कि लड़कियों को किसी मायने में खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए। उन्हें पढ़ाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही वह सीढ़ी है जिसके जरिए कोई भी किसी भी मुकाम पर पहुंच सकता है।
 

शक्ति संदेश:
नारी को क्षमताएं और योग्यता पैदा करनी चाहिए। यह जरूरी है। इसके साथ ही अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करके उसे पाने को खुद में आत्मबल जगाने की जरूरत है। यह भी जरूरी है कि नारी अपनी गरिमा बनाए रखे। अगर कुछ कर दिखाने का जज्बा होगा तभी मुकाम हासिल होगा। हालांकि आज नारी के प्रति समाज का नजरिया बदला है। नारी को पहले से अधिक स्वतंत्रता मिली है लेकिन वह कहने भर को है, समाज ने यह स्वतंत्रता मन से नहीं दी है। इसे कैसे हासिल करना है, यह नारी को ही सोचना होगा।
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-डॉ. शालिनी सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर- बरेली कॉलेज


शक्ति पुंज:
सुरक्षा के मोबाइल एप्स
आज मोबाइल जितना उपयोगी है, लड़कियों और महिलाओं के लिए मोबाइल एप्लीकेशन उतने ही ताकतवर हैं। तमाम एप्लीकेशन ऐसे हैं जो न केवल सतर्क करते हैं बल्कि खतरे से भी बचाते हैं। एप्लीकेशन बनाने वाली कंपनी एप्सडेली सॉल्यूशन की ओर से बनाए गए एसओएस सिस्टम की इमरजेंसी में लड़कियां परिवार के नंबर फीड कर सकती हैं, जो मुसीबत में उन नंबरों पर खुद-ब-खुद एसएमएस करते हैं। साथ ही इसमें ऐसा रिकार्डिंग सिस्टम है जो लोकेशन तो रिकार्ड करता ही है, किसी भी पल की पूरी रिकार्डिंग को परिवार के सदस्याें के फीड किए नंबरों पर भी भेज देता है। शहर के कई आउटलेट पर इन एप्स को हासिल किया जा सकता है और इन्हें डाउनलोड भी कर सकते हैं।
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