सरवरे कायनात पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा के लाल, लख्ते जिगर, नवासे हजरत इमाम हुसैन की यौमे शहादत को ताजा करते हुए मुस्लिमों ने खिराजे अकीदत का नजराना पेश किया। गमगीन माहौल में करबला पर ...या हुसैन की सदाओं के साथ तख्त ताजिए दफ्न किए। साथ ही अकीदतमंदों ने नियाज नजर कर लंगर और सबील बांटा।
यौम-ए-आशुरा पर सुबह से ही हर तरफ गमगीन माहौल था। लोग इमाम हुसैन सहित तमाम शहीदाने करबला की याद में डूबे रहे। दोपहर तक लोगों के घरों में चूल्हों पर तवे तक नहीं चढ़े। वहीं शहर के तमाम इलाकों से छोटे बड़े तख्तो ताजियों के बीच अलम व छड़ों के तमाम जुलूस और टोलियों का रुख बाकरगंज स्थित करबला की ओर था। इसमें शामिल इमाम हुसैन के दीवाने हुसैनी नारों की सदाएं बुलंद करते नंगे पांव करबला पहुंचते रहे।
इस बीच खानकाह नियाजिया से भी तख्तो ताजिए और अलम का जुलूस भी निकला। इसमें सभी अजादार हरे रंग के फकीरी लिबास में नंगे पांव शामिल रहे। अपनी एक अलग पहचान और खास अंदाज लिए यह जुलूस भी करबला पहुंचा। साथ में अन्य इलाकों को जुलूस भी शामिल रहे। जहां तख्तो ताजियों को दफ्न करने के बाद शहीदाने करबला को खिराजे अकीदत पेश करते हुए फातेहा और दुआ की गई। बाद में गेट के पास खानकाह की ओर से लंगर भी किया गया।
यह जुलूस सज्जादानशीन शाह मोहम्मद हसनैन नियाजी उर्फ हसनी मियां की सरपरस्ती और प्रबंधक सिबतैन हसन नियाजी उर्फ शब्बू मियां की कयादत में निकाला गया। इसमें नायब सज्जादा हाजी शाह मेंहदी मियां, शब्बर मियां नियाजी, डा. कमाल मियां नियाजी, कामिस मियां नियाजी, हाजी जाहिद मियां नियाजी सहित तमाम खानवादे शामिल रहे। साथ में मौलाना कासिम नियाजी सहित बड़ी तादात में मुरीद भी साथ रहे।
करबला पर तख्त ताजिए दफ्न करने की रस्म अदा करने के साथ ही अकीदतमंदों ने यहां के इमामबाडे़ पर भी हाजरी दी। यहां उन्होंने नियाज नजर के बाद गुलपोशी व चादर पोशी की और इत्र पेश किया। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।