बरेली। बेहाल सिस्टम का फायदा माफिया उठा रहे हैं। डोहरा रोड पर नकटिया के पास एक निर्माणकर्ता ने सैकड़ों टन मिट्टी नदी में फेंक दी थी। इससे नदी की जमीन पर कब्जा होने के साथ पानी के प्रवाह भी अवरुद्ध हो गया। मामला सामने आने के बाद बाढ़ खंड की टीम ने हफ्ताभर पहले निर्माणकर्ता को नदी से मिट्टी हटाने को कहा था, लेकिन अब तक मिट्टी तो हटी नहीं बल्कि नदी में कूड़े का ढेर और लग गया। जबकि बाढ़ खंड ने कुछ समय पहले ही एनजीटी के आदेश पर नदी की सफाई में लाखों की रकम लगाई थी।
प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारियों के निगरानी न करने और अवैध कब्जेदारों के खिलाफ कार्रवाई न होने से नकटिया नदी की जमीन पर हमेशा से ही भूमाफिया की नजर रही है। पिछले साल नवंबर में बाढ़ खंड ने नकटिया नदी की सफाई कराई थी। उस समय कई स्थानीय किसानों ने एसडीएम और बाढ़ खंड के अधिकारियों से से शिकायत की थी कि उनके खेतों की मिट्टी काटकर नदी का रुख बदल दिया गया है। इस पर राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच कर तहसीलदार आशुतोष गुप्ता को यह रिपोर्ट दी थी कि नदी का प्रवाह अपनी जगह पर ही है। इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए पीड़ित किसान दोबारा जांच के लिए डीएम नितीश कुमार को प्रार्थनापत्र दे चुके हैं। इस मामले में तहसील प्रशासन की क्लीन चिट मिलने के बाद कुछ दिन पहले नकटिया पुल के पास ही बाउंड्रीवाल बना रहे एक निर्माणकर्ता ने नदी के अंदर सैकड़ों टन मिट्टी डाल दी। नदी की जमीन पर मिट्टी का पटान कर कब्जा का मामला सामने आया तो बाढ़ खंड के अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया। फजीहत के बाद बाढ़ खंड की टीम 15 फरवरी को मौके पर गई और नोटिस देकर निर्माणकर्ता को नदी से तत्काल मिट्टी हटाने के निर्देश दिए, लेकिन अब तक मिट्टी नहीं हटाई गई। बल्कि एक-दो दिन पहले यहां मिट्टी के ढेर के पास ही बड़ी मात्रा में नदी के अंदर कूड़ा फेंक दिया गया है। यह कूड़ा किसने फेंका है, इसकी जानकारी नहीं हो सकी है लेकिन बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए वह नगर निगम का चिट्ठी भेजेंगे।
‘नदी के अंदर कूड़ा किसने फेंका है. यह पता लगाने के लिए एक-दो दिन में विभाग के एक सहायक अभियंता के नेतृत्व में टीम मौके पर जाएगी। जांच के बाद ही कुछ कहा जाता सकता है। इसके बाद नगर निगम को भी पत्र जारी किया जाएगा।’
- राजीव कुमार, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड