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दादरी की वारदात के बाद मंडल में 1375 खुराफातियों पर खुफिया नजर

Tue, 06 Oct 2015 01:25 AM IST
बरेली
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बरेली। दादरी की वारदात के बाद  खुफिया विभाग की रिपोर्ट  के आधार पर मंडल भर में 1375 खुराफातियों की निगरानी कराई जा रही है। इनमें से सियासी दलों, धार्मिक संगठनों से जुड़े 115 खुराफाती ऐसे हैं, जिनके मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लेकर सुने जा रहे हैं। यह अलग-अलग धर्मों के वे लोग हैं, जो धार्मिंक विवाद होने पर नेतागीरी करते हैं।
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यूपी में बरेली पहले से अति संवेदनशील शहरों की सूची में हैं। दादरी की वारदात के बाद से यहां की खुफिया एजेंसियों को और अधिक सक्रिय कर दिया गया है। एलआईयू के अलावा आईबी के अधिकारी भी शासन को यहां की पल-पल की रिपोर्ट दे रहे हैं। 13 नंबर से नवरात्र शुरू होने जा रहे हैं। 22 नवंबर को दशहरा है। इससे पहले 24 अक्तूबर को मोहर्रम पर ताजियों के जुलूस निकालेे जाने हैं। बरेली में शांतिपूर्वक त्यौहार कराने को 840 ऐसे लोगों को चिह्नित किया गया है, जो पिछले पांच सालों में हुए धार्मिक विवादों में शामिल रहे हैं। इनमें से 50 ऐसे लोगों के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लेकर सुना जा रहा है। इनमें से 22 लोग सियासी दलों के हैं। बाकी वे लोग हैं, जो दोनों समुदाय के लोगों को समझाकर मामला शांत कराने के बजाए दोहरी भूमिका में रहकर खुराफात कराते हैं। इसी तरह शाहजहांपुर में 200 खुराफाती चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 26 लोगों के मोबाइल सर्विलांस पर लेकर उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। बदायूं में 180 खुराफाती चिह्नित हुए हैं। उनमें से 22 के नंबर सर्विलांस पर लेकर उनकी गतिविधियों पर पुलिस-प्रशासन के अफसर नजर रख रहे हैं। पीलीभीत मंडल का सबसे कम संवेदनशील जिला है। यहां 155 खुराफाती चिह्नित किए गए हैं। जिसमें से 18 लोगों को सर्विलांस पर लेकर सुना जा रहा है। इनमें से किसी भी खुराफाती ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की तो उनके खिलाफ कार्रवाई होना तय है।

इंसेट----
पशु तस्कर करा करते हैं बवाल
बरेली के फरीदपुर में दरोगा मनोज कुमार मिश्रा की हत्या के आरोपी पशु तस्कर भले ही जेल चले गए हैं, लेकिन यहां  पशुओं की तस्करी करने वालों का गढ़ है। नेताओं के संरक्षण में बरेली में पशु तस्करी होती है। भोजीपुरा, भुता और फरीदपुर में सबसे ज्यादा पशु तस्कर रहते हैं। इसी तरह बदायूं का कादरचौक इलाका पशु तस्करों का गढ़ बना हुआ है। बरेली से रास्ता बदलकर पशु तस्कर बदायूं होकर ही निकल जाते हैं। पीलीभीत में पशु तस्करों ने वर्ष 2012 में प्रतिबंधित पशु भरे ट्रक से सदर कोतवाली की सरकारी जिप्सी में टक्कर मार दी थी। इस घटना में दो सिपाहियों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक होमगार्ड घायल हुआ था। पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के कस्बा शेरपुर कलां, गैहलुइया, गोरा रायपुर साहूकारा लाइनपार के मोहल्ला कुर्रेशियान में यह कारोबार बड़े पैमाने पर होता है। पुलिस रिकार्ड में भी इन गांवों को अतिसंवेदनशील माना गया है। इसके अलावा जहॉनाबाद, न्यूरिया और अमरिया इलाके में पशु वध के कई मामले प्रकाश में आ चुके हैं।  शाहजहांपुर में तिलहर, जलालाबाद, पुवायां, रोजा इलाके को पशु तस्करों का गढ़ कहा जाता है।
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-त्यौहारों को लेकर हम बेहद संजीदा है। अभी से पुलिस अधिकारियों से कह दिया गया है कि वह मोहर्रम के जुलूसों के मार्ग देख लें। हम खुराफात करने वालों को चिह्नित कराकर निगरानी करा रहे हैं। किसी ने माहौल खराब करने की कोशिश की उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी
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- विजय सिंह मीना, आईजी
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