नगर निगम के कैश काउंटर पर करीब एक सप्ताह से टैक्स जमा करने वालों की भीड़ बढ़ गई है। लोगों में बढ़े टैक्स पर गुस्सा तो है लेकिन क्लोजिंग मंथ में टैक्स न जमा करने पर 12.5 प्रतिशत ब्याज पड़ने का भी डर सता रहा है।
नगर निगम के जिन इलाकों का आउटसोर्सिंग कर्मचारी सर्वे कर चुके हैं, वहां बिल आठ-दस गुना तक बढ़ाकर भेजे गए हैं। लोग बिल कम कराने को चक्कर लगा रहे हैं। जिन इलाकों में सर्वे हुआ है वहां स्वकर प्रणाली के तहत लोगों से लाल रंग का फार्म भरवाया जा रहा है लेकिन जब लोग अपने मकान के टैक्स की गणना करके बिल जमा करने जाते हैं तो बिल काउंटर पर उनकी गणना को गलत बता दिया जाता है। मजबूरन उन्हें पुराने बिल के आधार पर टैक्स जमा करना पड़ता है। कामर्शियल टैक्स में तो और ज्यादा मुश्किल है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने बिना नाप जोख किए मनमाने तरीके से कवर्ड एरिया दर्शाकर किसी प्रतिष्ठान का बिल पिछले साल से भी कम कर दिया तो किसी प्रतिष्ठान को 10 गुना तक बढ़ाकर बिल भेजे गए। प्रतिष्ठान मालिकों और निगम कर्मचारियों के बीच टैक्स कम करने को लेकर सौदेबाजी की चर्चाएं चलीं। इन सबसे परेशान करदाता ब्याज के डर से क्लोजिंग माह के आखिरी सप्ताह में अपना टैक्स खुद लाइन लगाकर जमा करने में जुट रहे हैं। पिछले दो दिनों में 90.44 लाख की कर वसूली हुई, जिसमें कैश काउंटर पर ही 11.13 लाख रुपये जमा हो गए। दो माह पहले तक घर-घर जाकर भी इतनी कर वसूली नहीं हो पा रही थी।
‘कैश काउंटर पर रोज पांच-छह लाख टैक्स जमा हो रहा है। वसूली का पूरा औसत 20 लाख से ज्यादा है। अगर पूरे साल ऐसी ही कर वसूली हो तो किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। मार्च में प्रेशर कम करने के लिए हमें हर माह वसूली बढ़ानी होगी। -ईश शक्ति कुमार सिंह, उप नगर आयुक्त