नगर निगम कार्यकारिणी में आखिरकार अगले वित्तीय वर्ष का बजट आ ही गया। सदस्यों की आपत्तियों के चलते बजट पेश करने में भले ही देरी हुई लेकिन इसका फायदा ये हुआ कि अगले वित्तीय वर्ष के मूल बजट में कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाने के प्रयास कर लिए गए। सदस्यों के दबाव के बीच कार्यकारिणी के समक्ष 2.22 अरब का बजट रखा गया। बजट में पिछले वर्षों की वास्तविक आमदनी के समानांतर सड़क निर्माण समेत अन्य मदों की धनराशि में 25.31 करोड़ की कटौती कर दी गई। कार्यकारिणी ने पेयजल, सीवर, नाला सफाई और पार्कों के सौंदर्यीकरण में 10.70 करोड़ की बढ़ोत्तरी करते हुए 2.07 अरब के बजट को मंजूरी दे दी।
मंगलवार अपराह्न तीन बजे मेयर डा. आईएस तोमर की अध्यक्षता में प्रारंभ हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह ने जुलाई तक टैक्स जमा करने वाले ईमानदार करदाताओं को 10 प्रतिशत छूट देने का प्रस्ताव रखा। सभासद राजेश अग्रवाल ने मोशन प्रस्ताव रखा। 20 फरवरी 2014 के बजट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि उसमें भी प्रस्ताव संख्या छह में चार बिंदु रखे गए थे, जो कि नए प्रस्ताव में भी शामिल हैं। बोर्ड ने ये प्रस्ताव शासन को भेज दिया था। ये प्रस्ताव न बोर्ड से स्वीकृत हुआ, न ही इस पर शासन ने कोई निर्णय लिया। फिर भी नगर निगम ने वर्ष 2011-12 की टैक्स दरें लागू कर दीं और करदाताओं का सर्वे कराने के लिए बाहरी एजेंसी हायर कर ली। नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव ने कहा कि प्रस्ताव बोर्ड में लाने की जरूरत नहीं थी। सदस्यों ने नए प्रस्ताव पर बोर्ड में विचार करने पर सहमति जताई। बबलू खान ने बताया कि राजस्व में मोहर सिंह की तैनाती अनुचर के रूप में है लेकिन वह न केवल लिपिक का पूरा काम कर रहा है बल्कि अफसरों के समकक्ष एजेंसियों को विज्ञापन लगाने की अनुमति भी देता है। नगर आयुक्त ने मामले की जांच कर उसे पद से हटाने का आश्वासन दिया। बैठक में उपसभापति रेहान अली, उवैस खान, सुखदीश कश्यप, रचना मेहरोत्रा, छंगामल मौर्य, सुनीता यादव, ऊषा अरोड़ा समेत अफसर मौजूद रहे।
अगले वित्तीय वर्ष के मूल बजट की खास बातें
1- कालीबाड़ी में नई सीवर लाइन के लिए तीन करोड़ रुपये स्वीकृत
2- वाहनों में जीपीएस सिस्टम के लिए 15 लाख का प्रावधान
3- सड़क निर्माण की रकम 45 करोड़ से घटाकर 31.25 करोड़ की गई
4-आय सृजन की परियोजनाओं के लिए पांच करोड़ खर्च का प्रावधान
5-नगर निगम की बिल्डिंग के लिए छह करोड़ से घटाकर दो करोड़ को मंजूरी
6-नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक करोड़
7-सीबीगंज में कृषि योग्य जमीन के कराए जाएंगे टेंडर
8-नाला सफाई को 40 लाख से बढ़ाकर 60 लाख मिले
बजट की इन मदों में फेरबदल
1-नजारत व्यय को 70 लाख से बढ़ाकर 1.20 करोड़
2- अवस्थापना खर्च पांच करोड़ से घटाकर एक करोड़
3-13 वें वित्त का खर्च तीन करोड़ से बढ़ाकर चार करोड़
4- मरम्मत और अनुरक्षण पर 10 करोड़ से घटाकर 2.5 करोड़
5-सफाई उपकरण खरीद के लिए 4.5 करोड़ का प्रावधान
6- पार्कों के सौंदर्यीकरण में दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ खर्च होेंगे
7-नगर निगम के स्कूलों की मरम्मत के लिए 50 लाख
पांच करोड़ से पड़ेगी नई सीवर लाइन
कार्यकारिणी ने कालीबाड़ी, कटरा चांद खां, खुर्रम गौंटिया, फाल्टूनगंज और पुराना शहर में नई सीवर लाइन बिछाने के लिए तीन करोड़ रुपये स्वीकृत किए। दो करोड़ से गलियों में सीवर लाइन पड़ेगी। जलकल महाप्रबंधक एमएल मौर्य ने स्टाफ कम होने का हवाला देकर बजट कम करने की मांग की।
62 बीघा तालाब का उठेगा ठेका
सीबीगंज में 52 बीघा और खड़ौआ में 10 बीघा तालाब की जमीन तीन साल के लिए ठेके पर देने की मंजूरी मिली। अभी नगर निगम की इस जमीन पर अवैध कब्जेदार खेती कर रहे हैं। विशेष अनुदान में 10 करोड़ की कटौती कर पांच करोड़ रखा गया।
प्रत्याशा में काम स्वीकृत न किए जाएं
सदस्यों ने कहा कि सड़क निर्माण के लिए हर साल 65 करोड़ बजट स्वीकृत होता है। ठेकेदार एक अरब के काम स्वीकृत करा लेते हैं। बजट मिलता है सिर्फ 30 करोड़। बाकी काम अगले वर्ष के बजट में शामिल कर गोलमाल किया जाता है। प्रत्याशा में काम स्वीकृत कराने की परंपरा बंद की जाए।
सपा सदस्यों की नोकझोंक
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. एसपीएस सिंधू ने नाला सफाई के लिए 1.60 करोड़ की डिमांड की। उवैस खान भी उनके समर्थन में बोलने लगे। मेयर बोले- इस साल 40 लाख में 7.5 लाख ही खर्च कर पाए। अगले साल के लिए इतना कैसे मांगने लगे। इस पर सपा सदस्यों में ही काफी देर तक नोकझोंक चली। आखिर में 60 लाख का बजट मंजूर किया गया।
अवैध रोड कटिंग पर आक्रोश
संचार कंपनियों और जलनिगम द्वारा रोड कटिंग बिना स्वीकृति करने और निर्धारित समय सीमा 72 घंटे के अंदर गड्ढे न पाटने पर सदस्यों ने आक्रोश जताया। रोड कटिंग में 50 लाख से घटाकर 25 लाख की रकम रखी गई।
बजट में वर्जन
‘सीवर और पानी की उपेक्षा हो रही थी। अगले बजट में दोनों समस्याओं से राहत मिलेगी। निर्माण में अनावश्यक सड़कें स्वीकृत करने से घपले होते थे। अब हमारे पास जितना बजट होगा, उतना काम होगा’
राजेश अग्रवाल, नेता सपा पार्षद दल
‘सपा का वर्चस्व होने के बाद भी अगर बजट में कटौती हुई तो महापौर को इस पर विचार करना चाहिए। बजट की कटौती से विकास कार्य प्रभावित होंगे।’ विकास शर्मा, नेता भाजपा पार्षद दल
‘केंद्र में भाजपा और प्रदेश में सपा की सरकार है। भाजपा के सांसद को केंद्र से और मेयर को अपनी पार्टी की सरकार से ज्यादा बजट लाना चाहिए ताकि बरेली का विकास हो। नगर निगम के सीमित बजट में इधर से उधर करने से कुछ होने वाला नहीं है।’
सुप्रिया ऐरन, पूर्व मेयर
‘सड़क निर्माण में बजट कम रखने का फर्क पड़ेगा। सड़कें कम बन पाएंगी। बाकी बजट संतुलित है। नई सीवर लाइन पड़ने से जलभराव रोकने में मदद मिलेगी।’ डा. आईएस तोमर, मेयर