केस एक- बिहारीपुर कसगरान में एक साल पहले पांच गलियों के पक्के निर्माण के आगणन स्वीकृत किए गए। इनके दो बार टेंडर निकाल दिए गए। गड़बड़ी की जांच के नाम पर सड़कों का निर्माण अब भी लटका है।
केस दो- मलूकपुर में चमन मठिया के निकट तीन गलियों में ढाई साल पहले सीवर लाइन डालने के लिए सड़क खोदी गई। तबसे सड़क नहीं बनी। आए दिन दुघर्टनाएं होती हैं। जुगन गली भी डेढ़ साल से जर्जर है।
केस तीन, डेलापीर में मॉडल टाउन से आकाशपुरम तक एई ने 10 लाख की लागत से आधी सड़क स्वीकृत कर दी। आधी छोड़ दी। विरोध होने पर अब बची हुई 90 मीटर सड़क के दोबारा टेंडर निकाले गए हैं।
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। गलियों को पक्का करने के लिए सीसी या टाइल्स निर्माण के आगणन स्वीकृत किए गए। टेंडर हुए डेढ़ से दो साल बीत गए। फिर भी कोई न कोई बहाना बनाकर ठेकेदार इन सड़कों को बना नहीं रहे। दो माह में बरसात आने वाली है। अगर बरसात से पहले ये गलियां पक्की नहीं हुईं तो शहरवासियों की दुश्वारियां बढ़नी तय है।
पिछले साल सैनिक कालोनी में गली नंबर चार में टाइल्स की सड़क मंजूर हुई। ठेकेदार ने काम बीच में छोड़ दिया। लोग टाइल्स के ऊबड़ खाबड़ पत्थरों पर निकलने को मजबूर हैं। सुरेश शर्मा नगर चौराहे से संजय नगर बाईपास की सड़क जल निगम ने हाल ही में बनाई। खराब गुणवत्ता के चलते ये सड़क उखड़ने लगी है। बुखारपुरा में चार और डेलापीर की आधा दर्जन कालोनियों में बुद्ध विहार समेत अधिकांश सड़कें खस्ताहाल हैं। इनके स्थान पर नई सड़कें स्वीकृत हो चुकी हैं लेकिन इनका निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ है। मढ़ीनाथ, कोहाड़ापीर, पुराना शहर, नवादा शेखान, कटरा चांद खां, संजय नगर, दुर्गा नगर आदि में टाइल्स या सीसी निर्माण के काम स्वीकृत हैं। फिर भी इनको पूरा नहीं किया जा रहा। रीना गुप्ता, उर्मिला देवी, सीता पटेल, विक्रम सिंह, उवैस खान, मोहम्मद अकील गुड्डू आदि पार्षदों ने महापौर से अधूरी सड़कों का निर्माण पूरा करने की मांग की।
‘सड़कों के जो काम अधूरे हैं, उनको तुरंत पूरा कराया जा रहा है। पहले से स्वीकृत जिन कामों पर बजट शील लग चुकी है, उनको बरसात से पहले पूरा करा दिया जाएगा।’ सतीश कुमार, एक्सईएन नगर निगम