शहर को स्मार्ट बनाने के लिए दो साल पहले योजना बनी। डेढ़ साल पहले पीपीपी मॉडल के तहत विज्ञापन एजेंसी से चौराहों और पांच मार्गों पर डिवाइडर और यूनीपोल लगाने का अनुबंध किया गया। एजेंसी को तीन महीने के अंदर प्रोेजेक्ट पूरा करना था। इन कामों में से 13 माह में सिर्फ स्टेशन रोड पर डिवाइडर बना, वह भी आधा अधूरा।
नगर निगम ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड से सौंदर्यीकरण के तहत चौराहों, मार्गों पर डिवाइडरों के निर्माण का अनुबंध मै. प्रकाश संस एजेंसी से 20 फरवरी 2014 को किया था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार निविदादाता फर्म को ये काम तीन माह की अवधि में पूरा करना था और 10 साल तक इनका रखरखाव भी उसी को करना था। इसके बदले फर्म को अगले दो साल तक विज्ञापन लगाने का अधिकार दिया गया। न चौराहों का सौंदर्यीकरण हो पाया, न ही डिवाइडर और यूनीपोल लगे। ट्रैफिक सिग्नल लाइटें बाट जोह रही हैं।
पीपीपी मोड पर फर्म को तीन महीने के अंदर ये काम करने थे
चौराहा/रोड का नाम प्रस्तावित लागत फर्म से प्रस्तावित काम
स्टेशन रोड मार्ग 84.65 लाख डिवाइडर पुनर्निर्माण, यूनीपोल (10) लगाना, थमनेल्स
ट्रैफिक सिग्नल, रिफ्लेक्टर, जेबरा लाइन डालना, स्पीड ब्रेकर
बनाना, पोल (35) लगाना और स्टेच्यू निर्माण
नावल्टी चौराहा 16.70 लाख डिवाइडर का पुनर्निर्माण, यूनीपोल (4) कोतवाली की ओर सौ मीटर दीवार, ग्लोब (01) निर्माण, ट्रैफिक सिग्नल, रिफ्लेक्टर और स्पीड ब्रेकर का निर्माण
एसएसडी प्लाजा 7.13 लाख डिवाइडर पुनर्निर्माण, यूनीपोल (4), ग्लोब (01) निर्माण,
चौराहा ट्रैफिक सिग्नल (04), जेबरा लाइन डालना, रिफ्लेक्टर और
स्पीड ब्रेकर निर्माण
डेलापीर तालाब 35.42 लाख डिवाइडर पुनर्निर्माण, यूनीपोल (6) लगाना, थमनेल्स निर्माण, ट्रैफिक सिग्नल (3), लाइन डालना, रिफ्लेक्टर, दीवार, पोल (6) की स्थापना, बस शेल्टर और स्पीड ब्रेकर बनाना
धर्मकांटा चौराहा 18.60 लाख डिवाइडर पुनर्निर्माण, यूनीपोल लगाना, ट्रैफिक सिग्नल (4),
रंग रोगन और रोड पेंटिंग आदि।
एकता नगर चौराहा 77.70 लाख डिवाइडर का पुनर्निर्माण, यूनीपोल लगाना, थमनेल्स का निर्माण,
ट्रैफिक सिग्नल, लाइन डालना, रिफ्लेक्टर और स्पीड ब्रेकर बनाना
‘डिवाइडरों, यूनीपोल के डिजाइन के एप्रूवल मिलने में देरी हुई। इसी के चलते हमारा काम रुकवा दिया गया। अब एप्रूवल मिल चुका है। दो-चार दिनों में काम शुरू हो जाएगा।’ संजीव कुमार, प्रो. मै. प्रकाश संस
‘कोई नया काम करने पर थोड़ी बहुत कठिनाइयां आती है। एजेंसी को पूरा काम निर्धारित मानक से और जल्दी पूरा करना होगा। देर लगाने पर जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है।’ डा. आईएस तोमर, मेयर