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नगर निगम बोर्ड की बैठक में 2.74 करोड़ का पुनरीक्षित बजट पास

Sun, 28 Dec 2014 01:40 AM IST
बरेली
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नगर निगम बोर्ड की पुनरीक्षित बजट बैठक में बाढ़ आपदा राहत की मद में पांच करोड़ की हेराफेरी का मामला जमकर गूंजा। पार्षदों ने अफसरों को कटघरे में खड़ा करते हुए जालसाजी से मूल बजट में प्रस्तावित बाढ़ राहत की मद में 95 लाख की रकम को पुनरीक्षित बजट में 5.95 करोड़ कर मंजूर करा लेने और उसे सारे नियमों को ताक पर रखकर खर्च कर देने का आरोप मढ़ा। काफी देर हंगामे के बाद मेयर ने इस मामले में संबंधित इंजीनियरों को जवाब देने को कहा। पार्षदों ने इसके अलावा अफसरों पर लोगों को बढ़े हुए टैक्स के बिल भेजकर अवैध उगाही कराने समेत कई और गड़बड़ियों का भी आरोप मढ़ा। बैठक में करीब तीन घंटे तक आरोप-प्रत्यारोप चले और इसके बाद कार्यकारिणी से स्वीकृत 2.74 अरब के पुनरीक्षित बजट पर मुहर लगा दी गई।
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शनिवार दोपहर 3.30 बजे नगर निगम सभागार में मेयर डा. आईएस तोमर की अध्यक्षता में बैठक शुरू होते ही पार्षद राजेश अग्रवाल और गौरव सक्सेना ने मोशन प्रस्ताव रखते हुए पिछली बैठक का हाटमिक्स सड़कों की सूची का मामला उठाया। इस पर पार्षदों को 48 हॉटमिक्स सड़कों की सूची उपलब्ध कराई गई। तय हुआ कि इन सड़कों की गुणवत्ता की पीडब्ल्यूडी से जांच कराई जाएगी। इसके बाद पार्षदों ने बाढ़ आपदा राहत की मद में पांच करोड़ की हेराफेरी का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि 15 मार्च 2013 को रखे गए मूल बजट में बाढ़ आपदा राहत की मद में 95 लाख रुपये की मंजूरी दी गई थी। चार दिसंबर 2013 के पुनरीक्षित बजट बैठक में 95 लाख की रकम को जालसाजी से 5.95 करोड़ कर दिया गया और बोर्ड को गुमराह कर मंजूरी ले ली गई। इसके बाद टेंडर से लेकर काम कराने तक सारे नियमों को ताक पर रखकर कार्यकारिणी और बोर्ड की अनुमति लिए बगैर एसएफसी से भुगतान कर दिए गए।
सदन में इस मसले पर काफी देर तक हंगामा हुआ। पार्षदों ने इस धोखाधड़ी के लिए अफसरों को सीधे-सीधे जिम्मेदार ठहराया। आखिरकार मेयर ने इस मामले में निशाने पर इंजीनियरों को अपना जवाब देने का फरमान सुनाया। पार्षदों ने इसके बाद बिजली सामान की खरीद में भी घपले का आरोप लगाया। कहा कि मूल बजट में 2.75 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे लेकिन सिर्फ 25 लाख की लाइटें लगीं। बाकी रकम का कोई हिसाब नहीं है। इस पर भी अपर नगर आयुक्त को घपले की जांच कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया। शालिनी जौहरी ने एक सड़क के दो अलग-अलग नामों से स्वीकृत किए जाने और बबलू खान ने रोक के बाद भी 20 लाख की हाटमिक्स सड़कों के टेंडर चोरी से निकालने का आरोप लगाया। इन सभी मामलों की भी जांच के आदेश दिए गए। छंगामल मौर्य और आलोक तायल ने एकजुट होकर विकास की बात करने का सुझाव दिया।  
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टैक्स बिल घपले पर घिरे अपर नगर आयुक्त
टैक्स की बढ़ी दरों के बिल भेजने पर अपर नगर आयुक्त घिर गए। होटल का टैक्स 1.35 लाख रुपये जमा हो रहा था। बढ़ी दरों पर बिल 7.78 लाख का भेजकर करदाता से 1.82 लाख रुपये जमा कराए गए। अपर नगर आयुक्त सच्चिदानंद सिंह ने बिल बदलने की जांच दो दिन के अंदर कराकर दोषियों को दंडित करने की बात कही। मेयर ने खुद उनको कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि वह दोनों बिलों की कापी 25 दिन पहले भेज चुके हैं। अब तक क्या किया। अपर नगर आयुक्त इसका जवाब नहीं दे पाए। मेयर ने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी राकेश सोनकर को सदन के सामने खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि पहले होटल का बिल 17 हजार वर्ग फुट की गणना पर भेजा। लेन-देन के बाद चार हजार वर्ग फुट पर छह लाख से ज्यादा टैक्स कम कर दिया गया। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी जवाब नहीं दे पाए और चुपचाप खड़े रहे। आरबी सिंह प्रजापति के सड़क निर्माण के गलत आंकड़े रखने के आरोप पर संबंधित बाबू के निलंबन के आदेश दिए गए।  
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पुनरीक्षित बजट और खास बातें
1- टैक्स वसूली 20 करोड़ लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 5.5 करोड़ होने और शासन को गलत रिपोर्ट भेजने पर चुप्पी साधे रहे अफसर।
2- बिजली के सामान खरीद पर तीन करोड़ के प्रस्ताव में एक करोड़ की कटौती कर दो करोड़ का प्रस्ताव रखा गया।
3- मार्ग और सड़क निर्माण की राशि 18.75 करोड़ से बढ़ाकर 34.75 करोड़ की गई। बढ़े बजट से गलियां बनेंगी।
4- पार्कों के सौंदर्यीकरण पर मूल बजट एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये किए गए।
5- प्रत्येक वार्ड को ढाई सौ वाट की 25-25 लाइटें देने पर निर्णय लिया गया।
6- विकास शर्मा के मोशन पर पेशावर और असम में मारे गए निर्दोष बच्चों और नागरिकों की आत्मा की शांति को सदन ने दो मिनट का मौन रखा गया।  
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