जनता को गुमराह कर गलत ओपिनियन भेज रहे निगम अफसर
बरेली। स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंक हासिल करने के लिए नगर निगम अफसर जनता को गुमराह कर रहे हैं। शहर के नाले भरे पड़े हैं, सीवर चोक है, कूड़ा निस्तारण का कोई इंतजाम नहीं है लेकिन निगम अफसर जनता की सहभागिता के बहाने लोगों को गुमराह कर स्वच्छता सर्वेक्षण में ‘ओके’ रिपोर्ट भेज रहे हैं। मगर अमर उजाला की टीम ने शहर का जायजा लिया तो हालात काफी बदतर नजर आए।
नगर निगम क्षेत्र में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 120 नाले हैं, जिनमें से अधिकांश कूड़े से पटे पड़े हैं। इसकी वजह से हल्की बारिश में भी जलभराव के हालात बन जाते हैं और पानी सड़क पर जमा हो जाता है। सुभाषनगर, संजयनगर और पुराना शहर के तमाम इलाकों में यह आम बात है। इसके अलावा शहर की सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। मगर स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैकिंग हासिल करने के लिए नगर निगम की टीमों से लोगों से मिलकर ऑनलाइन भेजे जाने वाले ओपिनियन में सबकुछ ‘ओके’ होने की रिपोर्ट भिजवा रही है। नगर निगम कर्मचारी उनके मोबाइल में एप इंस्टाल करने के बहाने पूरा फीडबैक ही खुद भेज दे रहे हैं।
निगम के पास ही खुला पड़ा नाला
नगर निगम के पास ही पटेल चौक का नाला खुला पड़ा है। सड़क किनारे होने के कारण यह नाला कभी भी हादसे का सबब बन सकता है। निगम अफसरों ने न तो इसे बंद कराया और न ही इसकी ढंग से सफाई कराई है।
नाले पर कब्जा कर कूड़े से पाट दिया
श्यामगंज से सेटेलाइट की ओर जाने वाला नाला भी गंदगी और सिल्ट से पटा हुआ है। नाले पर अतिक्रमण कर दुकानें बना ली गई हैं और सफाई के बाद दुकानदार अपना कूड़ा नाले में ही डाल देते हैं।
डेयरी वालों पर भी कार्रवाई नहीं
चौपुला, पुराना शहर, आजमनगर, बानखाना, कोहाड़ापीर समेत तमाम इलाकों में डेयरियों का गोबर सीधे नालों में बहाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश होने के बावजूद इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
शहर में नालों और नालियों की सफाई के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं। जल्द ही नालों की सफाई करा दी जाएगी। - श्यामलता आनंद, अपर नगर आयुक्त
स्वच्छता सर्वेक्षण का फीडबैक देने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिन लोगों को असुविधा हो रही है, निगम कर्मचारी उनकी मदद कर रहे हैं। - संजीव प्रधान, पर्यावरण अभियंता