दस माह का पूरा कार्यकाल रहा विवादित, सीएम कार्यालय तक पहुंचा था मामला
मेयर से रही खींचतान, प्रभारी मंत्री, नोडल अफसर, कमिश्नर ने कराई थी पंचायत
कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने नगर आयुक्त पर कार्रवाई के मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
बरेली। क्रिसमस की खुशियों के बीच नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन नये साल की मनाने छुट्टी चले गए। फिर भी उनके सरकारी आवास की सजावट हुई थी, लेकिन नये साल का पहला दिन ही उन पर भारी पड़ गया। बुधवार को उनका ट्रांसफर प्रशासक, ग्रेटर शारदा के पद पर कर दिया गया। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. का पूरा कार्यकाल मेयर और पार्षदों से विवाद की वजह से चर्चा में रहा। उनके बीच का विवाद इतना गहरा चुका था कि मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बावजूद समाधान नहीं हो सका।
कै बिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने नगर आयुक्त की कार्यशैली से नाराज होकर उनका ट्रांसफर करने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा। विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश आए तो कमिश्नर रणवीर प्रसाद ने मेयर और नगर आयुक्त को बुलाकर मतभेद दूर कराने की कोशिश की, लेकिन दोस्ती फिर भी नहीं हुई। जिले के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा और नोडल अफसर नवनीत सहगल ने भी नगर आयुक्त को काफी समझाया। सहगल ने तो यहां तक कह दिया था, ‘अभी नौकरी काफी बची है, संभल जाओ नहीं तो झटका खा जाओगे।’ सहगल ने खुद रात में शहर का निरीक्षण किया तो गंदगी, जाम, टूटी सड़कें, बदबूदार कूड़ेदान, अतिक्रमण आदि पर कड़ी नाराजगी जताई थी। हालांकि, उनके निर्देशों पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। पिछले दिनों शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार ने भी शहर की बदहाली, भ्रष्टाचार का मामला उठाया तो इसकी गूंज मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंची।
विवादित मामले
सभासदों पर एफआईआर प्रकरण
जून में इंदिरा मार्केट की पोर्टेबल शॉप को लेकर हंगामा इतना बढ़ा कि पार्षद और मेयर को अपने ही नगर निगम में धरना प्रदर्शन को बाध्य होना पड़ा। स्थिति यहां तक आ पहुंची कि नगर आयुक्त के कहने पर प्रशासन ने नगर निगम में धारा 144 लगा दी और फोर्स भी तैनात कर दी। जबकि धारा 144 पहले से ही शहर में लगी हुई थी। इस मामले पर प्रशासन की भी किरकिरी हुई। फिर भी नगर आयुक्त पीछे हटने को तैयार नहीं थे। पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान, कार्यालय अधीक्षक आरपी सिंह की ओर से मेयर और पार्षदों पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। इसको लेकर निगम कर्मचारियों ने हड़ताल भी की थी। तत्कालीन डीएम ने किसी तरह मामला रफादफा करा दिया था, लेकिन तनातनी जारी रही।
स्मार्ट सिटी में मनमाने प्रोजेक्ट और उनके टेंडर में गड़बड़ी
22 सौ करोड़ रुपये का स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट भी विवादों में फंसा है। जनप्रतिनिधियों से दूरी बनाकर और अफसरों की सहमति से स्मार्ट सिटी के लिए प्रोजेक्ट बनाए जा रहे हैं। इसमें वर्टिकल गार्डन, सोलर ट्री, ओपन जिम, म्युजिकल फाउंटेन आदि के लिए टेंडर मांगे गए। सबसे ज्यादा हास्यास्पद स्थिति उस समय हुई जब वर्टिकल गार्डन के लिए जारी शर्तों में पांच इंच के गमले में फाइकस का पौधा लगाने की तैयारी थी। इसकी लंबाई कम से कम दस फीट तक होती है। जानकारी मिलते ही केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार और विधायक डॉ. अरुण ने सवाल दाग दिया और कमिश्नर को लिखे पत्र में तत्काल टेंडर रद्द करने को कहा। टेंडर रद्द तो हो गए लेकिन बाद में अन्य मदों के प्रोजेक्ट तैयार होने लगे। इसके लिए शाम से लेकर आधी रात तक बैठक की गई।
करोड़ों के घोटालेबाज पूर्व पीसीएस अफसर
को स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर का पद देना
यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) में तैनात रहे पूर्व पीसीएस सतीश कुमार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मिशन मैनेजर बनाया गया। तीन महीने पहले हुई तैनाती के बाद इस अफसर को सरकारी आवास, सर्किट हाउस में रुकने की सुविधा, सरकारी गाड़ी और सवा लाख का वेतन आदि दिया जाने लगा। इस बीच सतीश कुमार समेत की इस घोटाले में गिरफ्तारी हो गई। इससे स्मार्ट सिटी से जुड़े अफसरों की पोल खुली तो फजीहत बचाने के लिए सतीश कुमार को हटा दिया गया।
परसाखेड़ा में उजाड़ दी पोर्टेबल शॉप
तत्कालीन नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना ने बेरोजगारों के लिए परसाखेड़ा में कंटेनर नुमा पोर्टेबल शॉप रखवाईं थीं। मेयर और कुछ उद्यमियों के सहयोग से रखी गई इन शॉप को पिछले दिनों पुलिस लगाकर उजाड़ दिया गया। यह मामला अभी भी चल रहा है। केंद्रीय मंत्री और शहर विधायक उजाड़े दुकानदारों को फिर से बसाने की कसरत कर रहे हैं। यही स्थिति कमोवेश इंदिरा मार्केट और जिला पंचायत मार्ग पर रखी पोर्टेबल शॉप के साथ भी रही। रिश्वतखोरी का आरोप लगाए, प्रशासनिक जांच में पता चला कि पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल में कुछ गड़बड़ियां हुई थीं।
शहरी विकास के लिए कोई कारगर योजनाएं न बनाना
सैमुअल पॉल की पिछले साल 16 फरवरी को नगर आयुक्त पद पर तैनाती हुई थी। करीब दस माह तक पदभार संभालने के बावजूद शहरी विकास के लिए एक भी योजना नहीं बनाई। उनकी रुचि स्मार्ट सिटी में ही रही। स्थित यह हो गई कि किसी भी सड़क पर चले जाएं जगह-जगह रेता बजरी, ईंट का अवैध कारोबार, अतिक्रमण, गंदगी, नगर निगम के सामने मुख्य डलावघर की दयनीय स्थिति, गली मोहल्लों में बदहाली, नगर निगम में शामिल 48 गांवों में जनसुविधा का अभाव जैसे कई सारे समस्याएं मुंह खोले खड़ी रहीं। सुझाव और मांग के बावजूद यह अनसुना ही रहा।
कान्हा उपवन में गायों की मौत
पिछले दिनों सीबीगंज स्थित नगर निगम द्वारा संचालित कान्हा उपवन में सौ से ज्यादा गायों की संदिग्ध मौत हो गई थी। मेयर की ओर से उठाया गया यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा, जांच भी हुई। आरोप प्रत्यारोप के बीच नगर आयुक्त लीपापोती में ज्यादा व्यस्त रहे। इस बीच नोडल अफसर नवनीत सहगल समीक्षा बैठक के लिए आए तो यह मामला फिर उठा तो वह रात में ही कान्हा उपवन पहुंचे और मौजूद अव्यवस्थाओं को दूर करने के निर्देश दिए।
डोर टू डोर से शुरू हुआ था विवाद
शहर में मुफ्त में चल रही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन योजना को नगर आयुक्त ने दरकिनार कर इसे नये सिरे से शुरू करने के लिए मेयर को पत्र लिखकर दस करोड़ रुपये का बजट मांगा था। मगर मेयर ने प्रस्ताव को अस्वीकृत कर दिया था। इसके बाद ही नगर निगम में घमासान शुरू हुआ था। नगर आयुक्त ने बाकरगंज में लगे प्लांट में रुचि नहीं ली तो वहां का काम चौपट हो गया। वहीं, रजऊ परसपुर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को शुरू करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी शुरू कर दी। अरबों रुपये की कुष्ठ आश्रम की जमीन पर स्मार्ट सिटी के नाम पर कब्जा, कुतुबखाना में मल्टीस्टोरी पार्किंग में अड़ंगा और विकास कार्यों के टेंडर टुकड़ों में निकालने का मामला भी मुख्यमंत्री तक पहुंचा था।
एलन क्लब पर कब्जा प्रकरण
नजूल की जमीन की लीज 20 साल पहले खत्म होने के बाद एलन यूनियन क्लब पर कब्जा लेेने का निर्देश मेयर ने दिया था। नगर आयुक्त ने इसे अनसुना किया। बाद में कमिश्नर और डीएम के निर्देश मिले, तब कहीं 21 अक्तूबर को क्लब पर ताला जड़ दिया गया। दीवाली पर कार्यक्रम नहीं हुआ। इस मनमानी से भाजपा नेता नाराज रहे। हाल ही में परिसर क्लब गतिविधियों के लिए खोल दिया गया है। हालांकि, इससे जुड़े कई मामलों में अभी प्रशासन जांच भी करा रहा है।