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जल्द स्मार्ट सिटी बनेगी बरेली मगर तब तक अपनी सड़क खुद बनाएं

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तमाम पत्र लिखे जाने के बावजूद मेयर-नगर आयुक्त ने नहीं सुनी तो चक महमूदनगर वालों ने खुद बनानी शुरू की अपनी सड़क

पुराना शहर के गद्दियों वाले चौक की सड़क टूटी होने से सालों से परेशान थे लोग
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18 हजार की आबादी वाले इस वार्ड में एक-चौथाई गलियां अब भी हैं कच्ची

बरेली। 22 सौ करोड़ के बड़े बजट से ‘सपनों का शहर’ यानी स्मार्ट सिटी बसाने की योजना में नीचे से ऊपर तक हर अफसर व्यस्त है। नतीजा यह है कि पब्लिक कहीं चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर को ढूंढती फिर रही है और कहीं सफाई करने वाले स्टाफ को मगर फिलहाल नगर निगम में किसी को पब्लिक की फरियादें सुनने की फुर्सत नहीं है। मेयर और नगर आयुक्त को तमाम पत्र लिखने के बाद भी सालों से उजड़ी सड़क नहीं बनी तो चकमहमूदनगर वालों ने अब चंदा करके खुद यह सड़क बनानी शुरू कर दी है
चक महमूदनगर के लोगों का कहना है कि गद्दियों वाले चौक की सड़क कई सालों से टूटी-फूटी पड़ी है। अब इस पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया था। हालत यह है कि घर से निकलते ही सीधे गड्ढे में पैर पड़ता है। बरसात में घरों से निकलना और मुश्किल हो जाता है। लोगों ने बताया कि उन्होंने नगर आयुक्त और मेयर दोनों को तमाम चिट्ठियां लिखीं लेकिन कोई काम नहीं हुआ। लिहाजा अब वे खुद सड़क बना रहे हैं। शनिवार को अमर उजाला की टीम जब चक महमूदनगर में पहुंची तो गद्दियों वाले चौक में मिले सलीम, अलाउद्दीन आदि ने बताया कि वे लोग सीमेंटेड सड़क बना रहे हैं। जब भी पैसों की जरूरत पड़ती है, आपस में चंदा करके इकट्ठा कर लेते हैं।
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स्मार्ट सिटी से हमें क्या लेना-देना
पार्षद कमरुल निशा के बेटे मुशर्रफ अली अंसारी ने बताया कि 18 हजार की आबादी वाले इस वार्ड में न तो पानी की लाइन है और न ही सीवर की। वार्ड में करीब सवा सौ गलियां हैं, इनमें 25-30 आज भी कच्ची हैं। अख्तर की डेयरी के पास पूरे साल पानी भरा रहता है। गद्दियों वाले चौक के पास ही सालों से हैंडपंप खराब है। मगर मरम्मत नहीं कराई गई। सफाई व्यवस्था की स्थिति यह है कि नालियां सिल्ट से भरी हैं और पानी ओवरफ्लो हो रहा है। कूड़े के जगह-जगह ढेर लगे हैं। ये सारे वे काम हैं, जिन्हें कराने को किसी बड़े बजट की जरूरत नहीं है लेकिन स्मार्ट सिटी बना रहे अफसरों की प्राथमिकता में पुराना शहर नहीं है।

धरना-प्रदर्शन का भी असर नहीं
वार्ड की समस्याओं को लेकर नगर निगम में विरोध प्रदर्शन किया। धरना भी दिया गया। मेयर और नगर आयुक्त को पत्र तो अनगिनत लिखे गए लेकिन अफसर सिर्फ कागजों को आगे बढ़ाते हैं। न तो कोई यहां के हालात देखने आता है और न ही कोई सुधार किया गया। - कमरुल निशां, पार्षद

पक्ष हो या विपक्ष हर पार्षद परेशान
निगम अफसर स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट बनाने में व्यस्त हैं, दो साल होने जा रहे हैं लेकिन कोई काम अब तक नजर नहीं आया। जनता छोटी-छोटी समस्याएं खराब स्ट्रीट लाइट, गंदगी से परेशान है। छोटी-छोटी मरम्मतें तक नहीं हो रही हैं। - अब्दुल कयूम मुन्ना, पार्षद शाहबाद
बिना बजट के निगरानी और मेहनत से होने वाला काम नगर निगम अफसरों को पसंद ही नहीं आता है। पहले इन्हीं कर्मचारियों से सफाई का काम होता था, अब पांच करोड़ रुपये का बजट पास नहीं हुआ तो सफाई व्यवस्था चौपट कर दी है। - अतुल कपूर, पार्षद, सौदागरान
नगर निगम के अफसर स्मार्ट सिटी बनाने में व्यस्त हैं। बजट खपाने के आए दिन नए-नए इंतजाम हो रहे हैं। अब सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए प्राइवेट कर्मचारी लगा दिए हैं जबकि खुद निगरानी करानी चाहिए। - सतीश कातिब, पार्षद, इंदिरानगर
नगर निगम अफसरों का फोकस बड़ी-बड़ी योजनाओं पर सफाई, पेयजल किल्लत जैसी छोटी समस्याएं उनकी प्राथमिकताओं में नहीं है। छोटी शिकायतों के पत्र एक अफसर से दूसरे अफसर के पास दौड़ते रहते हैं और काम नहीं होता। - वीरेंद्र पटेल, पार्षद ब्रह्मपुरा
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