रसूल की आमद मरहबा: झूम के निकले नबी के दीवाने
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बरेली। जुलूसे मोहम्मदी में हमेशा की तरह नबी के दीवाने सड़कों पर निकले तो माहौल की रंगत ही बदल गई। लोबान की खुशबू से भरे माहौल में सड़कों पर सफाई कर पानी का छिड़काव करते दस्तों के पीछे खाने काबा, गुबंदे खिजरा, ख्वाजा गरीब नवाज और आला हजरत के आस्ताने की खूबसूरत झांकियां लेकर जुलूस बढ़ा तो रुहानी मंजर पैदा हो गया। इससे पहले दरगाह आला हजरत के प्रमुख सुब्हान रजा खां सुब्हानी मियां और सज्जादानशीन अहसन रजा खां अहसन मियां की दस्तारबंदी की गई।
जुलूसे मोहम्मदी में सवा सौ से ज्यादा अंजुमन शामिल हुईं। रसूल की आमद मरहबा, नबी का दामन नहीं छोड़ेंगे जैसे नारे लगाते हुए युवा और बच्चे रंगबिरंगी अरबी और शाही पोशाकों में सजे हुए थे। सुब्हानी मियां की कयादत और अहसन मियां की निगरानी में कोहाड़ापीर से शुरू हुआ जुलूस कुतुबखाना, नावल्टी, इस्लामियां कालेज रोड, करोलान के रास्ते बिहारीपुर होता हुआ सौदागरान में दरगाह आला हजरत पर पहुंचकर संपन्न हुआ। इससे पहले कमेटी के शान रजा, कासिम कश्मीरी, आरिफ उल्लाह, कैफी उल्लाह ने सुब्हानी मियां और अहसन मियां की दरस्तारबंदी की। इसके बाद सुब्हानी मियां ने सैय्यद शबाब हुसैन को परचम सौंपकर जुलूस रवाना किया। इससे पहले अहसन मियां की कयादत में किले की अंजुमनें मुख्य जुलूस में शामिल हुईं। जुलूस की व्यवस्था में नासिर कुरैशी, शाहिद नूरी, अजमल नूरी, हाजी जावेद खां, परवेज नूरी, औरंगजेब नूरी, तारिक सईद, ताहिर अल्वी, गिजाल सिद्दीकी, यामीन राईन, सैय्यद मुदस्सर अली, अफरोज मियां मुल्ला जी आदि का सहयोग रहा।