बरेली। मेयर उमेश गौतम ठीक नौ दिन बाद बृहस्पतिवार को कान्हा उपवन में दोबारा निरीक्षण करने पहुंचे। पता चला कि इस बीच वहां 14 और गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई है। मगर पशु चिकित्सकों के लगातार कहने के बावजूद वहां न तो दवाओं का इंतजाम किया गया है और न ही अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त हुईं हैं। मेयर ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से मामले की जांच कराने की मांग की है।
मेयर उमेश गौतम ने पहले 15 अक्तूबर को कान्हा का निरीक्षण कर 15 दिन में 30 गायों की मौत होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से जांच कराने की मांग की थी। अगले ही दिन नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने इसके जवाब में प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर मेयर के निरीक्षण सुनियोजित करार दिया। हालांकि इस मामले की जांच के लिए नगर आयुक्त ने तीन सदस्यीय कमेटी भी गठित कर दी। इस बीच बृहस्पतिवार दोपहर मेयर उमेश गौतम अचानक फिर कान्हा पहुंच गए। बृहस्पतिवार को भी वहां तीन गोवंश की मौत होने की बात सामने आई, इनमें से दो दफन हो चुके थे और एक का शव मौके पर मिला। रिकार्ड देखने से पता चला कि 16 अक्तूबर से 24 अक्तूबर के बीच कान्हा में 14 गोवंशीय पशुओं की मौत हो चुकी है। बताया गया कि प्रतिदिन दस बोरी चोकर जानवरों को दिया जा रहा है, जबकि यह बीस बोरी होना चाहिए। इस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की है।
दवाओं की कमी और आपसी टकराव से मौतें
नगर आयुक्त ने प्रमुख सचिव को भेजे पत्र में कान्हा में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त बताई थीं। मगर यहां के रिकार्ड ने सारी पोल खोल दी है। पशु चिकित्सकों ने महीने भर में निरीक्षण के दौरान सात बार पत्र भेजकर दवाइयों की कमी एवं अन्य गड़बड़ियों का जिक्र किया है। यहां लगातार निरीक्षण करने वाले पशु चिकित्सक डॉ. राजीव सिंह के मुताबिक जुलाई से अब तक 12 गायों के पोस्टमार्टम हुए हैं। अधिकांश मौतें जानवरों के आपसी संघर्ष, दवाआें की कमी और बेहतर देखभाल न होने से हुई हैं।
विशेषज्ञों ने बताईं यह कमियां
- सांड़ों के लिए अलग शेड नहीं हैं, इससे वे गायों पर हमला कर रहे हैं।
- 300 जानवरों की क्षमता है लेकिन वहां 587 पशु हैं।
- पानी के लिए बड़ी टंकी नहीं है।
- नालियां खुली पड़ी हैं, जिनमें फंसकर जानवर चोटिल हो रहे हैं।
- सर्दी शुरू हो रही हैं लेकिन पर्याप्त शेड का अब तक इंतजाम नहीं हुआ है।
- 20 जानवरों पर एक व्यक्ति होना चाहिए, वहां 50 पर एक है।
कान्हा की व्यवस्थाएं दुरुस्त की जा रही हैं। वहां हुई गोवंश की मौत की अभी जांच चल रही है। बृहस्पतिवार को मेयर के निरीक्षण के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। इसे भी जांच रिपोर्ट में शामिल कर लिया जाएगा। - ईश शक्ति सिंह, अपर नगर आयुक्त
मुख्यमंत्री से मेरी मांग है कि शासन स्तर से कमेटी गठित करके कान्हा में गायों की मौत की जांच कराएं। यहां डॉक्टरों में दवाओं की कमी, अलग शेड समेत तमाम जरूरतें बताई हैं लेकिन निगम अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। - उमेश गौतम, मेयर
‘सैमुअल पॉल एन. आईएस हैं, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं’
- पशु वैज्ञानिकों के संगठन ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, उनसे कराई जाए गायों की मौत की जांच
बरेली। पशु वैज्ञानिकों के संगठन इंडियन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ वेटनरी रिसर्च के फाउंडर सेक्रेटरी डॉ. ऋषींद्र वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. आईएएस हैं, पशु चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं। मेयर और नगर आयुक्त में लगातार विवाद भी चल रहा है इसलिए नगर आयुक्त द्वारा जांच उचित नहीं है। डॉ. ऋषींद्र का कहना है कि वह पशु चिकित्सा में लंबा अनुभव रखते हैं और आईवीआरआई में सेंट्रल एनीमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोसिस में ज्वाइंट डायरेक्टर पद से रिटायर हैं इसलिए गायों की मौत की बेहतर जांच कर सकते हैं। उनकी जांच गोवंश के रखरखाव, भौतिक स्वास्थ्य, दाना-चारा, टीकाकरण, दवाई, मृत पशुओं का निस्तारण, फंड का सही उपयोग, चिकित्सा आदि बिंदुओं पर होगी।