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चहेते ठेकेदारों के लिए लटका दिए 29 करोड़ के काम, मेयर ने मांगा जवाब

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बरेली। नियम-कायदों को ताक पर रखकर एकसाथ मंजूर हुए 234 निर्माण कार्यों के अलग-अलग तारीख में टेंडर निकालने से नगर निगम के अफसरों की मंशा पर सवाल खड़ा हो गया है। इस गड़बड़ी की वजह से न सिर्फ तमाम निर्माण कार्य समय पर शुरू हो पाए बल्कि उनकी टेंडर प्रक्रिया तक लटक गई। मेयर उमेश गौतम ने इस मामले में प्रभारी मुख्य अभियंता संजय चौहान से चार बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह चेतावनी भी दी है कि स्पष्ट जवाब न मिलने पर इस मामले में जांच के लिए मुख्यमंत्री और नगर विकास मंत्री को लिखा जाएगा।
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माना जा रहा है कि नगर निगम अफसरों ने यह गड़बड़ी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की मंशा से की। दरअसल लोकसभा चुनाव के बाद नगर निगम में 16 अगस्त को आयोजित 14वें वित्त आयोग की बैठक में 28.85 करोड़ रुपये की लागत से 234 निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई थी। ज्यादातर काम नगर निगम क्षेत्र में सड़कों और नाले-नालियों के निर्माण के थे। नगर निगम के निर्माण विभाग ने इन टेंडर में हेराफेरी कर दी। मेयर उमेश गौतम का कहना है कि ये निर्माण कार्य एकसाथ मंजूर हुए थे लिहाजा उनके टेंडर भी एकसाथ निकाले जाने चाहिए थे लेकिन कुछ ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए उन्हें अलग-अलग तारीखों में निकाला गया। यह इस बात से भी पता लग रहा है कि तमाम निर्माण कार्य के लिए सिर्फ एक ही ठेकेदार ने आवेदन किया है या फिर कोई आवेदन ही नहीं आया है। यानी साफ जाहिर है कि टेंडर सिर्फ उन ठेकेदारों को दिए गए हैं जिनसे सांठगांठ हो गई है और बाकी टेंडर दोबारा कराए जा रहे हैं।
पूछा- दिसंबर के बाद कैसे बनेंगी सड़कें
प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय चौहान को लिखे पत्र में मेयर ने कहा है कि दिसंबर में सर्दियां शुरू हो जाएंगी और फिर मौसम हॉटमिक्स सड़कों को बनाने के लिए अनुकूल नहीं रहेगा। जाहिर है कि अगर जल्द ये काम शुरू नहीं हुए तो काफी समय के लिए लटक जाएंगे। इस मनमानी से नगर निगम और भाजपा सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने कहा है कि बृहस्पतिवार को दोपहर दो बजे तक प्रभारी चीफ इंजीनियर संजय चौहान स्पष्टीकरण दें अथवा स्वयं उपस्थित होकर अवगत कराएं। इस संबंध में पक्ष जानने के लिए प्रभारी चीफ इंजीनियर को फोन किया गया लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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इन बिंदुओं पर मांगा स्पष्टीकरण
- किन कारणों से 16 अगस्त की बैठक में स्वीकृत सभी कार्यों के टेंडर एकसाथ नहीं निकाले गए
- टेंडर प्रकाशित करने में विलंब क्यों किया गया
- टेंडरों का बंटवारा कर अलग-अलग तिथियों में ठेकेदारों से मिलीभगत कर टेंडर क्यों डलवाए गए
- 14वें की बैठक में स्वीकृत कार्य कब तक पूरे होंगे
अगस्त में हुई बैठक में 234 निर्माण कार्य मंजूर हुए थे जिनका टेंडर करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है। ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए ये टेंडर टुकड़ों में बांट देने से निर्माण कार्य प्रभावित हुए हैं। प्रभारी चीफ इंजीनियर से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। स्थिति स्पष्ट न होने पर जांच के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। - उमेश गौतम, मेयर
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