बरेली। एक तरफ शहर गंदगी से बेहाल है, दूसरी तरफ नगर निगम सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर समय बर्बाद करने के अलावा कुछ करने को तैयार नहीं है। एनजीटी के आदेश पर रजऊ परसपुर में प्लांट बंद होने के सालों बाद भी नगर निगम इसे दोबारा चालू कराने या फिर रजऊ से शिफ्ट करने पर कोई फैसला नहीं ले पाया है। मेयर की ओर से पिछले साल फरीदपुर के गांव बहगुलपुर में प्लांट लगाने के लिए जमीन खरीदकर नगर निगम को दान में दी गई थी लेकिन निगम के अफसरों ने उसे अनुपयुक्त बताकर ठुकरा दिया है। अब रजऊ के पास ही सतरापुर में प्लांट लगाने के लिए दूसरी जमीन देखी गई है। इसके अधिग्रहण के लिए शासन को लिखा गया है।
नगर निगम में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट पर लंबे समय से कोई फैसला नहीं हो पा रहा है। केंद्र सरकार की 2005 में मंजूरी के बाद सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट रजऊ परसपुर में इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी से सटी जमीन पर बना था जिसका 13 मार्च, 2013 को एकेसी डेवलपर्स ने संचालन शुरू किया। प्लांट शुरू होते ही नगर निगम और इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति उमेश गौतम के बीच खींचतान शुरू हो गई। एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट में मुकदमे चले जिसके बाद मई 2014 में एनजीटी ने प्लांट को बंद करने का आदेश कर दिया। 2017 में मेयर बनने से पहले उमेश गौतम ने नगर निगम को फरीदपुर के गांव बहगुलपुर में प्लांट लगाने के लिए करीब 110 बीघा जमीन खरीदकर दान में दी। तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव यहां प्लांट लगवाने की प्लानिंग कर रहे थे, इसी बीच फरवरी में उनका ट्रांसफर हो गया। उनके बाद निगम अफसरों ने इस जमीन को शहर से ज्यादा दूरी पर बताते हुए प्लांट के लिए उपयुक्त नहीं माना। अब नगर निगम ने नेशनल हाईवे पर रजऊ के पास गांव सतरापुर में प्लांट लगाने के लिए 10 एकड़ जमीन देखी है। कागजी कार्रवाई पूरी कर नगर निगम अब इसका अधिग्रहण करने की तैयारी में है।
मुसीबत में शहर.. बाकरगंज का प्लांट भी बंद
नगर निगम ने गुजरात की अमेजो वेस्ट सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ बाकरगंज में कूड़ा निस्तारण प्लांट लगाने के लिए करार किया था। इसमें नगर निगम को कोई निवेश नहीं करना था, सिर्फ प्लांट के लिए जमीन देनी थी। ट्रायल के लिए पिछले साल कंपनी ने एक प्लांट लगाकर जनवरी में इसका संचालन शुरू कर दिया। मगर तत्कालीन नगर आयुक्त के ट्रांसफर के बाद मौजूदा अफसरों ने इसमें रुचि नहीं ली। पहले तो प्लांट से निकलने वाले तेल में कमी निकाली गई फिर इसकी अनदेखी शुरू कर दी गई। परिणामस्वरूप यहां काम करने वाले लोगों की रुचि खत्म हो गई और धीरे-धीरे यह प्लांट भी बंद हो गया। यहां लगने वाले सात अन्य प्लांट भी नहीं लगे।
बोर्ड ने टाला तो शासन को भेजा पांच करोड़ का प्रस्ताव
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में हो गया था स्थगित
बरेली। नगर निगम में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन को बजट देने के मुद्दे पर ही टकराव शुरू हुआ था। डोर-टू-डोर के लिए पांच करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में स्थगित होने के बाद नगर आयुक्त ने अब यह प्रस्ताव शासन को भेजा है।
बता दें कि नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. की तैनाती के बाद से ही मेयर उमेश गौतम से उनका टकराव सामने आने लगा था। नगर आयुक्त के निर्देश पर प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान ने डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया था। मगर मेयर ने डोर-टू-डोर सेवा फ्री में संचालित होने का हवाला देकर इस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया था। इसके बाद मेयर और नगर आयुक्त के बीच लंबे समय घमासान चला। नगर निगम में धरना प्रदर्शन और हंगामे भी हुए, जिनके चलते चार मुकदमे भी दर्ज कराए गए। शासन के दखल पर मेयर और नगर आयुक्त के बीच ‘दोस्ती’ हुई तो डोर-टू-डोर के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में लगाया गया लेकिन वहां भी उसे स्थगित कर दिया गया। अब नगर आयुक्त ने डोर-टू-डोर के लिए पांच करोड़ रुपये देने का यह प्रस्ताव शासन को भेजा है।
केंद्र और प्रदेश सरकार कूड़ा निस्तारण व्यवस्था दुरुस्त करने पर काफी जोर दे रही है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के लिए सतरापुर गांव में दस एकड़ जमीन देखी गई है। आगे की प्रक्रिया पूरी कर इसका जमीन अधिग्रहण किया जाएगा। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए पांच करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया गया है। - संजीव प्रधान, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी