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साहब! डलावघर के बहाने तालाब क्यों पाट रहे हैं

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बरेली। नगर निगम में तालाब पाटने और खोदने का खेल चल रहा है। पिछले सालों खुदवाए गए तालाब निगम की अनदेखी के चलते अतिक्रमण कर पाट दिए गए और अब जल संचयन के नाम पर फिर से इनकी खुदाई शुरू कराई गई है। डेलापीर तालाब को लेकर क्षेत्रीय पार्षद शशि सक्सेना ने डलावघर की आड़ में निगम पर ही तालाब पाटने के आरोप लगाए हैं।
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पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के कार्यकाल में डेलापीर, हरूनगला और सीबीगंज के तालाबों में कई दिन तक जेसीबी लगाकर खुदाई कराई गई थी। हालांकि उस समय तालाबों की खुदाई पर नगर निगम ने कोई धनराशि न खर्च कर मिट्टी तालाब खोदने वाले ठेकेदारों को दे दी थी। मगर इसके बाद नगर निगम की अनदेखी के चलते इन तालाबों पर अतिक्रमण हो गया और यह धीरे-धीरे पटने लगे। अब शासन ने जल संचयन के फिर आदेश दिए तो शनिवार से नगर निगम ने डेलापीर, फाइक इन्क्लेव के पीछे दो तालाब और खड़ौआ में इनकी खुदाई शुरू कराई है। शनिवार को डेलापीर में खुदाई के दौरान निगम की दो जेसीबी भी खराब हुईं। वहीं निगम की अनदेखी के चलते पटान के बाद दोबारा खुदाई कर धनराशि खर्च करने को लेकर अब निगम के अफसरों पर सवाल उठ रहे हैं।

निगम का डलावघर ही निगल रहा डेलापीर का तालाब
डेलापीर तालाब की जमीन पर ही नगर निगम ने सड़क किनारे डलावघर बना दिया है। कूड़े के साथ ही मिट्टी आने से यहां धीरे-धीरे तालाब का एक बड़ा हिस्सा पट चुका है। इसको लेकर पार्षद शशि सक्सेना ने मेयर उमेश गौतम को पत्र लिखकर नगर निगम पर डलावघर की आड़ में तालाब पाटने की साजिश करार दिया है। उनका कहना है कि इससे न सिर्फ वहां गंदगी होती है, बल्कि तालाब का पानी भी प्रदूषित होता है।
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