रुहेलखंड विश्वविद्यालय में नैक मूल्यांकन के लिए आई टीम ने तीसरे दिन शिक्षकों और कर्मचारियों से बातचीत कर समस्याएं सुनीं। इसमें शिक्षकों ने लैब व्यवस्थित न होने और साइंस जर्नल न आने की बात कही। उन्होंने प्रमोशन का मामला भी उठाया। वहीं, कर्मचारियों ने कहा कि शिक्षकों की तरह उनका ग्रेड पे भी यूजीसी तय करे।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के नैक मूल्यांकन के लिए आई टीम तीन दिन से विभागों का जायजा ले रही है। वहां की व्यवस्थाएं देखने के बाद बुधवार को टीम ने शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ बैठक कर बातचीत की। उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि क्या समस्याएं हैं? पहले शिक्षक कुछ नहीं बोले, लेकिन बार-बार पूछने पर प्रमोशन के मुद्दे को उठाया गया। इस पर टीम के सदस्यों ने कहा यह उनका कंसर्न नहीं है। इस पर एक शिक्षक बोलीं, अगर शिक्षक का प्रमोशन नहीं होगा तो वह रिसर्च आदि एकेडमिक काम कैसे करेगा। वह कोर्ट-कचेहरी में अपने हक के लिए लड़ने में ही सारा समय बिता देगा। विश्वविद्यालय में कब काम करेगा। शिक्षकों का प्रमोशन होगा तो वह विश्वविद्यालय के लिए भी ईमानदारी से काम कर पाएंगे। इस पर नैक टीम के सदस्यों ने कोई जवाब नहीं दिया। सदस्यों ने कहा कि कुछ और समस्याएं बताएं। एक शिक्षक ने विश्वविद्यालय में विज्ञान के जर्नल न आने की बात कही। लैब की अव्यवस्था का भी मुद्दा उठाया। दूसरे शिक्षक ने विश्वविद्यालय में एंबुलेंस न होने की जानकारी दी। इस दौरान निरीक्षण दल ने शिक्षकों को सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय में ज्यादा से ज्यादा छात्रों के दाखिले के लिए 12वीं के छात्रों को लैब और लाइब्रेरी में विजिट कराएं। उन्हें यहां पर काम करने का मौका दें जिससे वह विश्वविद्यालय के बारे में जान सकें और बाद में दाखिला भी लें। उन्होंने फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के बारे में पूछा। सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों ने कहा कि विश्वविद्यालय उन्हें अपना शिक्षक नहीं मानता है। सेल्फ फाइनेंस शिक्षकों को कार्यपरिषद, विद्या परिषद जैसी कमेटी में सदस्य नहीं बनाया जाता जब कि उनकी नियुक्ति भी बाकी शिक्षकों की तरह ही हुई है। गेस्ट टीचर्स ने बताया कि विश्वविद्यालय में उनके लिए कोई सर्विस रूल नहीं है।
इसके बाद टीम के सदस्यों ने कर्मचारियों के साथ बैठक की। कर्मचारियों ने कहा कि शासन विश्वविद्यालय की सर्वोच्च बॉडी कार्यपरिषद के निर्णयों को भी नहीं मानता है। शिक्षकों का ग्रेड पे यूजीसी तय करता है और कर्मचारियों का शासन। शासन में उन्हें सुविधाएं ही नहीं मिल पाती है। इसलिए, उनका ग्रेड पे भी यूजीसी से तय होना चाहिए।
----------
एससी/एसटी गर्ल्स हॉस्टल का भी हुआ निरीक्षण
बरेली। नैक टीम के सदस्यों को दूसरे दिन एससी/एसटी गर्ल्स हॉस्टल में कोई निरीक्षण के लिए नहीं ले गया। वॉर्डन डॉ. अनीता त्यागी के कहने के बाद उन्हें हॉस्टल का निरीक्षण कराया गया। हॉस्टल में जाकर सदस्यों ने छात्रों से भी सुविधाओं पर बातचीत की। वॉर्डन ने उन्हें बताया कि लेट आने पर छात्राओं से किस तरह से फाइन लिया जाता है। हालांकि व्यवस्थाओं को देखकर निरीक्षण दल संतुष्ट दिखा।