बरेली। आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा का परिवार मनहूसियत के साए से बचने के लिए अब अपनी पुरानी कोठी छोड़ टाइप फाइव के आवास में रहेगा। वैज्ञानिक के परिवार ने उस घर में डॉ. दीपक शर्मा की हत्या देखी। इसलिए, परिवार उस कमरे में जाकर दर्दनाक हादसे को भूल नहीं पा रहा है। बार-बार उन्हें वही क्षण उन्हें दुखों से घेर लेता है।
आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक शर्मा की हत्या के बाद अब उनके परिवार में सिर्फ उनकी पत्नी और बुजुर्ग मां बची हैं। बेटा और बहू का तेरहवीं के बाद बंगलूरू जाने का प्रोग्राम है। इसके बाद वैज्ञानिक की मां और पत्नी निर्मला ही बचेंगी। ऐसे में अब फिर उस पुराने घर में रहना, जहां डॉ. दीपक शर्मा की नृशंस हत्या हुई हो, वहां अब न तो उनके लिए खतरे से खाली है और न ही उनके मन को शांति देने वाला है। इसलिए उनके परिवार ने निदेशक से आवास बदलने की गुजारिश की थी। परिवार आईवीआरआई के टाइप-फाइव के घर में रहना चाहता है। टाइप-फाइव में ही कोठी इतनी ही बड़ी है, लेकिन वहां पर आसपास के घरों में इतनी दूरी नहीं है कि एक-दूसरे से बोल-चाल न हो। परिवार इस घर में रहने से डरता भी है। उसे लग रहा है कि घर बदलकर शायद कुछ सुरक्षित हो सके।
क्राइम ब्रांच छानबीन में लगी है
-प्रधान वैज्ञानिक डॉ.दीपक शर्मा की हत्या का खुलासा करने को क्राइम ब्रांच की टीम लगी हुई है। रविवार को भी टीम सारे दिन आईवीआरआई परिसर में डेरा डाले रही, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। सीओ असित श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक हत्या के संबंध में कोई खास क्लू नहीं मिला है।