नगर निगम में पद से अधिक जिम्मेदारियां सौंपकर राम सिंह जाटव को नगर निगम का रत्न बनाने वाले नगरआयुक्त ने अब उत्तम कुमार वर्मा को एक और पद से नवाजते हुए नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार को रिलीव कर दिया है। उत्तम कुमार के पास पर्यावरण के अलावा निर्माण विभाग के एई की भी जिम्मेदारी थी अब अतिक्रमण और शहर की सफाई व्यवस्था भी उन्हीं के हवाले रहेगी।
उत्तम कुमार वर्मा के कामकाज के खिलाफ पार्षदों ने भी बोर्ड और कार्यकारिणी की बैठक में खूब सवाल उठाए। बावजूद इसके उनको नई- नई जिम्मेदारी मिलती रही है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार को नगर आयुक्त द्वारा रिलीव करने के बाद कार्यवाहक स्वास्थ्य अधिकारी के तौर पर यूके वर्मा को चार्ज सौंपा गया है। बताया जा रहा है कि पर्यावरण अभियंता और मुख्य सफाई निरीक्षक से भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी की अनबन की खबरें ऊपर तक पहुंच रही थीं। उनको गंभीरता से भी नहीं लिया जाता था।
ताकि चलता रहे गाड़ियों और तेल का खेल
बरेली। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को जो पत्र दिया गया है उसमें लिखा है कि प्रशासनिक और जनहित में उनको कार्यमुक्त किया जाता है। लेकिन इसके पीछे वजह कुछ और ही है।
दरअसल, डॉ. अशोक कुमार और मुख्य सफाई निरीक्षक विमल कु मार मिश्रा की अनबन किसी से छिपी नहीं है। विमल मिश्रा के पास सभी चार गैराजों की सौ से अधिक गाड़ियों का चार्ज है। लिपिक और चीफ के हस्ताक्षर से ही इनमें तेल डलता और निकलता है। मुख्य सफाई निरीक्षक ने आजतक कभी डॉ. कुमार का कहना नहीं माना। वह सीधे नगर आयुक्त और मेयर से बात करते रहे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने यह समस्या नगर आयुक्त और मेयर को भी बताई थी। जब इंस्पेक्टर को गाड़ियाें के सत्यापन की बात कही गई, इसे भी लागू नहीं किया गया। डॉ. अशोक कुमार ने गाड़ियों की रिपोर्ट होली से पहले बनाकर भेजी। डॉ. अशोक कहते हैं कि किसी को नहीं पता कि निगम की गाड़ियां कहां- कहां चल रही है। उन्होंने बताया कि उनके कई पत्राें को दबा दिया गया और कई रिसीव नहीं किए गए। पूरे निगम की स्थिति अच्छी नहीं है। संविदा की होने वाली भर्ती कमेटी से भी उनको हटा दिया गया।
उनका स्टॉफ के साथ सामंजस्य नहीं बन पा रहा था, तो वह खुद अपने आपको रिलीव करने के लिए कह चुके थे। यह सामान्य प्रक्रिया है। उनको रिलीव कर दिया गया है।
शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
सभी जानते हैं कि मैने किस तरह से काम किया है। विभाग में हर कर्मचारी मनमानी कर रहा है। मेरी कोई सुनता नहीं था। मैने कई रिपोर्ट दी और पत्र भेजे लेकिन दबा दिया गया।
डॉ. अशोक कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी