ट्रैफिक लाइटें ठीक कराने के मामले में नगर निगम ने प्रशासन को गुमराह किया है। खराब लाइटाें को दुरुस्त कराए बगैर ही कमिश्नर को उन्हें ठीक कराने की रिपोर्ट भेज दी गई। जागर जनकल्याण समिति ने जब अपर मंडलायुक्त को सच्चाई बताई तो वह चौंक गए। उन्होंने नगर निगम को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी मांगी है। समिति के सचिव डॉ. प्रदीप का कहना है कि अगर इस बार भी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो अदालत की शरण ली जाएगी।
शहर के चौपुला, चौकी चौराहा, अयूब खां चौराहा, बीसलपुर तिराहा, सेटेलाइट और मिनी बाईपास तिराहे पर सबसे अधिक ट्रैफिक रहता है। यहां ट्रैफिक लाइटें खराब होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने 30 लाख रुपये से अधिक की लागत से उन्हें ठीक कराने का दावा किया। जागर समिति के सचिव डॉ. प्रदीप के मुताबिक, जो लाइटें ठीक कराई गई हैं उनमें सिर्फ चौकी चौराहा और सेटेलाइट की लाइटें ही शामिल थीं, जबकि बताया गया कि छह लाइटों को ठीक कराया गया है। डॉ. प्रदीप का कहना है कि उप्र में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं ऐसे में इतनी लापरवाही ठीक नहीं है। अपर मंडलायुक्त ने आश्वासन दिया है कि वह इस मामले में आवश्यक कदम उठाएंगे। इस दौरान समिति के नवीन चोपड़ा और शिशुपाल भी मौजूद थे।