- ईओ को ज्ञापन देकर की जांच की मांग, सामने आई वित्तीय अनियमितताएं, शासन को भेजा गया पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदपुर। पालिका अध्यक्ष शराफत जरीवाला पर मनमानी, भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कई सभासदों ने बुधवार को नपा कार्यालय के परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। अध्यक्ष के खिलाफ नारेबाजी की। सभासद देवेंद्र सिंह टोनी, रंजीत चौहान, संजीव शुक्ला आदि ने नपा अध्यक्ष पर सिस्टम को बंधक बनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद ईओ को ज्ञापन देकर आरोपों की जांच कराने की मांग उठाई है। अधिशासी अधिकारी (ईओ) पुनीत कुमार की ओर से पहले की गई जांच की तो लिपिक राजेश, प्रदीप और महावीर को वित्तीय घोटालों का दोषी पाया गया। आरोप है कि अध्यक्ष के करीबी होने के कारण उन पर कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने शासन को पत्र भेजकर आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है।
मुख्य आरोप :
1, उच्चाधिकारियों की ओर से की गईं पिछली जांचों को अध्यक्ष ने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर अपने स्तर से निरस्त करने की कोशिश की।
2, ईओ और जिलाधिकारी की स्वीकृति के बावजूद 35 आउटसोर्सिंग कर्मियों का वेतन और ठेकेदारों के भुगतान जानबूझकर रोके गए हैं।
3, जिलाधिकारी से स्वीकृत एक वर्ष पुरानी योजनाओं के टेंडर स्वार्थ के चलते जेम पोर्टल पर अपलोड नहीं होने दिए जा रहे हैं।
4, मृतकों के आश्रितों को मानवीय आधार पर देय भुगतानों का भी अध्यक्ष की मंजूरी का इंतजार है।
5, नियमानुसार हर माह होने वाली बोर्ड बैठक पिछले पांच माह से नहीं हुई है, जिससे नगर की सफाई, जल और प्रकाश व्यवस्था अव्यवस्थित है।
6, फॉगिंग मशीन रिपेयरिंग का कार्य भी सिविल ठेकेदारों से कराया गया। जो कि पंजीकृत मैकेनिकल फर्म से कराया जाना चाहिए।
सामान का भुगतान फर्जी दस्तावेज के जरिये करने का आरोप -
सभासद अजीम मियां के आरोपों ने बताया कि कीटनाशक दवाएं लाइसेंस धारक के बजाय सिविल ठेकेदार से खरीदी गईं। बिना बोर्ड की अनुमति के छह एसी लगवाए गए और फर्जी दस्तावेज के जरिये भुगतान भी कर दिया गया। नाला सफाई के लिए 40 सफाईकर्मी लगाए गए, लेकिन भुगतान 50 को ही किया गया।
मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं था इसलिए बैठक नहीं हुई। ठेकेदारों के कार्यों में अनियमितता है इसलिए भुगतान रोका गया है। आरोप निराधार हैं। — शराफत जरीवाला, अध्यक्ष, नपा फरीदपुर
घोटाले में संलिप्त लिपिकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र भेज दिया गया है। — पुनीत कुमार, अधिशासी अधिकारी