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मम्मी-पापा बाजार जाएं.. युवाओं को ऑनलाइन खरीदारी ही भाये

सार

परंपरागत बाजार या ई-कॉमर्स, खरीदारी के हर मौके पर जहन में यह सवाल उभरना लाजमी है। शादी-ब्याह और त्योहारों के मौकों पर जब भी कारोबार के लिए सीजन माना जाता है, तब यह सवाल और खास हो जाता है। सेल, डिस्काउंट और ऑफर जैसे लुभावने शब्दों की ई-कॉमर्स साइटों के साथ परंपरागत बाजार में भी जब भरमार होती है तब यह तय करना मुश्किल होता कि खरीदारी आखिर कहां की जाए। ऐसे में एक नया सवाल उभरता है- साख का और कहीं इस पर परंपरागत बाजार खरा उतरता है तो कहीं नामचीन ऑनलाइन कंपनियां। इन सवालों के बीच पीढ़ियों के शौक और प्राथमिकताओं में भी फर्क साफ नजर आता है। आदतन पुराने लोग परंपरागत बाजारों का ही रुख करते हैं लेकिन अपना समय बचाने के साथ सहजता और विभिन्नता की मुरीद नई पीढ़ी ई-कॉमर्स बाजार के साथ प्रयोग करना चाहती हैं। जाहिर है कि यह कटौती परंपरागत बाजार के कारोबार में ही होती है लेकिन अब परंपरागत बाजार ने भी इसे स्वीकार कर लिया है। इस बाजार में अब एक लचीलापन भी साफ दिखाई देता है ताकि उसके यह नुकसान सीमित ही रहे।
 
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ऊना में करवाचाथ को लेकर खरीदारी करती युवती। - फोटो : अमर उजाला
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ई-कॉमर्स की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ा मगर परंपरागत बाजार में भी ग्राहकों की कमी नहीं
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दोनों ही बाजारों में साख का सवाल सबसे बड़ा, गैरविश्वसनीय खरीद से बचना चाहते हैं लोग

बरेली। भीड़भाड़ और मोलभाव से बचने के लिए तमाम लोग ई-कामर्स बाजार पर निर्भर होते जा रहे हैं। लॉकडाउन लगने के कुछ दिनों बाद जब कोरियर सेवाएं बहाल हुई तक लोगों ने ऑनलाइन बाजार को ही पसंद किया। इसमें सबसे ज्यादा युवा और छात्र वर्ग सबसे ज्यादा आगे है। वे छोटी-छोटी वस्तुएं भी मंगा रहे हैं। इसका प्रभाव सामान्य बाजार पर पड़ता है लेकिन कारोबार क्षेत्र व्यापक होने से दोनों व्यापार अपने-अपने स्थान पर जमे हुए हैं।
ऑनलाइन बाजार का लगातार दायरा बढ़ता जा रहा है। क्योंकि सामान्य बाजार में भी हेराफेरी, मिलावट की भरमार है, इसलिए लोग ई-कामर्स की ओर बढ़ने लगे हैं। ज्यादातर युवा और छात्र वर्ग इस ओर खिंच रहा है। इसलिए सामान्य बाजार इससे प्रभावित भी हुआ है। दोनों कारोबार में खूबियां और कमियां हैं।

परंपरागत बाजार की चुनौती.. कम मुनाफे में पूरी करनी पड़ रही ज्यादा गुणवत्ता की चाहत

ऑनलाइन कंपनियों के रेट लेकर खरीदारी करने आने वालों से होती है मुश्किल
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ई-कॉमर्स साइट पर खरीदारी का चलन शुरू होने के बाद परंपरागत बाजार की चुनौतियां काफी बढ़ी हैं। इस वजह से इस बाजार में काफी लचीलापन भी आया है और कारोबारियों को कम मुनाफे में बेहतर गुणवत्ता की लोगों की चाहत पूरी करनी पड़ रही है। हालांकि परंपरागत बाजार में इस चुनौती से बचने के लिए डुप्लीकेट सामान का भी चलन बढ़ा है। सेल के नाम पर भी ग्राहकों को गुमराह करने की कोशिश होती है। राशन और किराना की चीजों में मिलावट के मामले भी इस बाजार से लोगों के बेजार होने की एक वजह है लेकिन फिर भी परंपरागत बाजार इन चुनौतियों का लगातार सामना कर रहा है। ज्यादातर कारोबारियों ने अब सामान बदलने या वापस लेने की गारंटी देना शुरू कर दिया है। ग्राहकों को अपने उत्पाद के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी देने और बेहतर विकल्प सुझाने की भी कोशिश की जाती है।

ई-कॉमर्स साइटों पर खरीदारी करने को जरूरी है ठगी-धोखाधड़ी से बचने की समझदारी

इंटरनेट पर ऑनलाइन कारोबार करने वाली ई-कॉमर्स साइटों की भरमार है और यहां ठगों का भी जाल फैला हुआ है। नामचीन कंपनियों से मिलते-जुलते नामों की साइट बनाकर ग्राहकों की जेब काटने की घटनाएं आम हैं। जाहिर है कि अगर सावधानी और समझदारी नहीं दिखाई तो ऑनलाइन खरीदारी घाटे का सौदा बनते देर नहीं लगेगी और कानूनी तौर पर फर्जी कंपनियों से पैसा लेना भी आसान नहीं है। कंप्यूटर-मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का सामान बदल देना, क्षतिग्रस्त सामान देना या पार्सल से मंगाई गई चीज ही गायब जैसी तमाम मिसाल इस बाजार में हैं। फायदे की गारंटी तभी है जब अच्छी साख रखने वाली कंपनियों से समझदारी के साथ खरीदारी की जाए। इसके लिए इंटरनेट के जरिये होने वाले ठगी के खेलों की जानकारी होना भी काफी जरूरी है। जाहिर है कि यह समझ युवाओं में ही ज्यादा बेहतर होती है।

ई-कॉमर्स: ये हैं नुकसान

हजारों कंपनियां ऐसी हैं जो ई-कामर्स बाजार में बेहतरीन सेवा देने का दम तो भरती है लेकिन ऐसा करती नहीं हैं। आम शिकायत है कि कुछ कंपनियां डिलीवरी के बाद पसंद न आने पर सामान बदलने के वादे से किनारा कर लेती हैं। न कंपनी के कस्टमर केयर पर ग्राहक की फरियाद सुनी जाती है न कोरियर वाले इसे अपनी जिम्मेदारी मानते हैं। कुछ कंपनियां टैक्स की भी हेराफेरी कर रही हैं।

फायदे भी तमाम

घर बैठे मनपसंद सामान मिलता है। भुगतान भी चेक या इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से किया जा सकता है। कीमत को लेकर मोलभाव नहीं करना होता है, सिर्फ अलग-अलग साइटों पर तुलना करनी होती है। मिलावट, घटतौली और हेराफेरी की गुंजाइश कम है। कोरोना के दौर में भीड़भाड़ से बचने के लिए भी यह माध्यम ठीक है। सामान मिलने के बाद भुगतान करने की सुविधा के साथ परंपरागत बाजार की तुलना में कोई भी चीज किफायती कीमत में मिलने की संभावना ज्यादा रहती है।

ऑनलाइन सामान सस्ता हो सकता है लेकिन उसकी गारंटी और वारंटी पर कुछ नहीं जा सकता। खराब होने के बाद कोई सुनवाई भी नहीं होती है। इलेक्ट्रॉनिक्स के ऑनलाइन बाजार में ऐसे मामले आम हैं।- विपुल गर्ग, इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसायी

एफएसडीए का नियम है कि डॉक्टर के परचे के बगैर किसी को दवा नहीं दी जा सकती। दवा के परंपरागत कारोबार में इसका पालन भी किया जा जाता है लेकिन ऑनलाइन दवाएं मंगाने पर यह नियम टूट जाता है। - दुर्गेश खटवानी, दवा कारोबारी

युवाओं में ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन बढ़ा है क्योंकि वे बाजार जाने के बजाय इंटरनेट पर जानकारी लेकर कुछ न कुछ मंगाते रहते हैं। अब तो खाने और पीने की चीजें भी फोन करते ही पहुंच रही हैं। - ऋतुराज बास, व्यापारी नेता

वाणिज्य कर और सीजीएसटी विभाग ऑनलाइन और परंपरागत दोनों कारोबार पर निगरानी करते हैं। ऑनलाइन कारोबार से टैक्स मिलता है। टैक्स चोरी की शिकायत मिलने पर कंपनी और कारोबारी पर कार्रवाई होती है। - गौरी शंकर, वाणिज्य कर उपायुक्त प्रशासन

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