नत्थो देवी के पति वेदराम की 2002 में अचानक मौत हो गई। चार बच्चों की परवरिश करने की जिम्मेदारी अकेली मां पर थी। भाग दौड़ के बाद पति की जगह चतुर्थ श्रेणी की किसी तरह नौकरी मिली। मां ने नौकरी के साथ घरेलू रोजगार कर और बैंक से लोन लेकर बेटियों और बेटों को बराबर मानकर पढ़ाया। आज बड़ी बेटी सुमनलता एमटेक कर चुकी है। वह विदेश जाकर पीएचडी करना चाहती हैं। इसके लिए दिल्ली में तैयारी कर रहीं हैं। बेटा देवेंद्र भी बी टेक है। दूसरी बेटी किरन दिल्ली यूनर्विसिटी में बीएससी और छोटा बेटा सौरभ इंटर में है। नत्थो देवी का कहना है कि पति की मौत के बाद पहली बार घर से निकली तो समाज के ताने थे। बेटी ने कहा कि एमटेक करेंगे। एजूकेशन लोन के लिए बैंक के चक्कर काटे लेकिन नहीं मिला। पर्सनल लोन लेकर फीस भरी।
बरेली में किला क्षेत्र की रहने वाली खालिदा खान हाउस वाइफ हैं, पति ताहिर अली खान वन विभाग में थे जिनका दो साल पहले इंतकाल हो चुका है। दो बेटियां हैं, फातिमा खान और जैनब खान। स्नातक तक पढ़ीं खालिदा का सपना था कि उनकी बेटियां उनसे भी ज्यादा पढ़ लिख सकें। शुरू से ही उन्होंने बेटियों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। पति ताहिर अली की मौत बेटी का हौसला पस्त नहीं होने दिया। छोटी बेटी फातिमा ने इसी साल सीए की परीक्षा पास की है। जेनब साफ्टवेयर इंजीनियर है। खालिदा कहती हैं कि उनका सपना उनकी बेटियों ने पूरा किया।
तलाक के बाद दुंधमुंही बच्ची और डेढ़ साल का बेटा भी छीन ली
बिहार कला में एक बेबस मां अपनी सात महीने की दुधमुहीं बेटी और डेढ़ साल के मासूम बेटे को देखने के लिए तड़प रही है। रात को अचानक उसकी चीख निकल पड़ती और उठकर बैठ जाती है। पति ने गुस्से में तलाक दिया बाद में गलती भी मानी। वापस लेने को तैयार था लेकिन बिरादिरी के लोग बिना हलाला के वापस लेने पर हुक्का पानी बंद करने की धमकी दे बैठे। लड़की के पिता ने शर्त नहीं मानी। पंचायत बैठी और तय हुआ कि बच्चे पति की जिम्मेदारी में रहेंगे। बच्चों की मां की जिम्मेदारी मायके वाले उठाएं। इस पंचायत में मां का कोई पक्ष सुनने वाला नहीं था। न ही कोई इतनी समझ वाला जो समझ सके कि दुधमुंहे बच्चे छिन जाने पर मां पर क्या बीतती है।
ऑटो रिक्शा चालक हसन की जरा सी गलती ने परिवार में तूफान खड़ा कर दिया। हसन की पड़ोस में ही ससुराल है। उसने पत्नी को गुस्से में तीन बार तलाक कह दिया था। हालांकि पत्नी पहले ही दिन से उसके साथ रहने को तैयार थी। पति और पिता में विवाद होने के बाद वह थाने से दोनों को छुड़ा ले गई थी। यह करीब पांच महीने पुरानी बात है। मोहल्ले वालों की मदद से बिचौलियों ने हसन को पत्नी से बात ही नहीं करने दी। दूरियां इतनी बढ़ा दीं कि उसके डेढ़ साल के बेटे हमजा और सात महीने की बेटी अलवीरा को पति को जबरन दिलवा दिया। पांच महीने से तड़प रही मां की परेशानी अब परिवार वालों की भी समझ में आ रही है। उन्हें भी अपनी गलती का अहसास हो गया है। भाई और पिता भी चाहते हैं कि किसी तरह हसन और उनकी बेटी बच्चों के साथ हंसी खुशी रहने लगे लेकिन ये होगा कैसे ये नहीं सूझ रहा है।
बेटी बेच दी. तलाक दे दिया
थाना प्रेमनगर के मोहल्ला भूड़ निवासी शावेज के संपर्क में रहने के दौरान लड़की ने एक बेटी को जन्म दिया। मां बनने के बाद मोहल्ले वालों के दबाव में शावेज ने लड़की से निकाह तो कर दिया लेकिन उसकी दुधमुंही बेटी को ठिरिया निजावत खां के दंपति को बेच दिया। इसके बाद फिर तलाक देकर फरीदपुर के बुुजुर्ग से निकाह करा दिया। वहां के भागकर आने के बाद पीड़िता ने शावेज के खिलाफ मुकदमा लिखाया, लेकिन विवेचना करने वाले दरोगा मनोज कुमार ने चार्जशीट लगाने के बाद आरोपी को क्लीनचिट दे दी। ये बेचारी मां सबसे ज्यादा उस बच्ची के लिए परेशान है जिसे बेच दिया गया।
तलाकशुदा जिएगी बेटी के लिए
यासमीन को पति ने तीन तलाक देकर बेघर कर दिया। वह अपनी तीन साल की बेटी ईरम को साथ लिये दो दिन तक पति के बुलावे के इंतजार में भटकती रही। कहीं आसरा नहीं मिला तो इज्जतनगर स्थित मायके में भाइयों ने इंसाफ की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया। कहती है कि मुझे अपने लिये नहीं बेटी के लिए इंसाफ चाहिए। खुद तो पढ़ लिख नहीं सकी, लेकिन ईरम को पढ़ाना चाहती हूं। चाहे जितनी मेहनत करनी पड़े, मैं अपनी बच्ची को जरूर पढ़वाऊंगी। यासमीन ने इज्जतनगर थाने में अपने पति असलम निवासी रहपुरा परतापुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है। जिसकी जांच पुलिस कर रही है।
कोहिनूर की वापसी की आस
कोहिनूर का नाम जुबां पर आते ही उनकी आंखें घर के दरवाजे की तरफ टकटकी बांधे ताकने लगती हैं। उन्हें आस है कि एक दिन खिलखिलाती हुई कोहिनूर लौट आएगी। उनके कलेजे से लिपटकर उन्हें जिंदगीभर की खुशियां देगी। जिक्र कर रहे हैं बिथरीचैनपुर के मनपुरिया दलेल के कदीरउद्दीन की पत्नी अफसाना की। जिनकी आठ साल की बेटी कोहिनूर को 21 अगस्त 2016 की रात घर के आंगन में सोते हुए बदमाश ले गये थे। आठ महीने से परिवार पुलिस अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। लेकिन कोहिनूर का पता नहीं चल सका है। अफसाना ने हार नहीं मानी है कहती है हम खुद अपनी बेटी को ढूंढ निकालेंगे।