स्कूलों की मनमानी से पेरेंट्स परेशान हैं। फीस बढ़ाने का मामला हो या महंगी किताबों का, स्कूल उनकी जेब काटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। उधर, प्रशासन पेरेंट्स की शिकायतों को लेकर गंभीर नहीं है। शुक्रवार को महिला जागृति मंच के साथ बच्चों की मम्मियां और बहनें स्कूलों की ओर से इस शोषण के खिलाफ सड़क पर उतर आईं। रैली निकालकर डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह के पास शिकायत लेकर पहुंचीं लेकिन डीएम कार्यालय से उठकर चले गए तो उनका गुस्सा और बढ़ गया। नाराजगी जताई तो एसीएम विशु राजा वहां पहुंचे, पेरेंट्स का गुस्सा शांत किया और ज्ञापन लेकर शिकायतें दूर कराने का आश्वासन दिया।
अमर उजाला की हेल्पलाइन पर सैकड़ों अभिभावक स्कूलों की मनमानी को लेकर शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। किसी की शिकायत स्कूल के फीस बढ़ाने की है तो कोई सिलेबस महंगा होने से परेशान है। तमाम अभिभावकों ने जिला प्रशासन से भी शिकायत की है, मगर इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि अधिकारी कहते हैं कि अभिभावक शिकायतें ही नहीं कर रहे हैं। शुक्रवार को महिला जागृति मंच की अध्यक्ष डॉ. मनु नीरज के साथ बच्चों की मम्मियां और बहनें चौकी चौराहे पर एकत्र हुईं। इसके बाद शांतिपूर्वक रैली निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। मगर पेरेंट्स की भीड़ देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने कलेक्ट्रेट का गेट बंद कर उन्हें अंदर घुसने से रोक दिया और कहा कि कोई अधिकारी यहां पर ही ज्ञापन ले लेगा। इस पर उन लोगों ने गुस्सा दिखाया और कहा कि ज्ञापन तो डीएम को ही देंगे। इस पर चार लोगों को अंदर जाने की अनुमति मिली। इसके बाद डॉ. मनु नीरज और राधा समेत चार महिलाएं डीएम कार्यालय पहुंचीं। वहां मौजूद अर्दली ने उनका ज्ञापन अंदर पहुंचा दिया। वे लोग मिलने के इंतजार में बैठे थे और इसी बीच डीएम वहां से उठकर चले गए।
गुस्साई मां-बहनें तो एसीएम ने सुनी शिकायतें
डीएम के चले जाने पर डॉ. मनु नीरज एवं अन्य पेरेंट्स गुस्साने लगे तो एसीएम विशु राजा डीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने सभी को अंदर बुलाकर बात सुनी। डॉ. मनु नीरज ने कहा कि डीएम ने जब चार्ज लिया था तो उसी दिन उन लोगों ने स्कूलों की मनमानी के विरोध में ज्ञापन दिया था लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्कूल मनमानी कर रहे हैं और जिला प्रशासन कह रहा है कि उनके पास अभिभावक शिकायत लेकर नहीं आते। अब इतनी धूप में वे लोग शांतिपूर्वक रैली निकालकर पहुंचे हैं तो डीएम उनकी बात सुने बिना ही चले गए। लगता है जिला प्रशासन इस मुद्दे पर कुछ करना ही नहीं चाहता। इस पर एसीएम ने डीएम के जरूरी काम से जाने की बात कहते हुए ज्ञापन राज्यपाल तक भिजवाने का आश्वासन दिया। डॉ. मनु ने कहा कि अगर सप्ताह भर में समाधान नहीं हुआ तो जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध तेज कर धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रमुख मांगें
- समान पाठ्यक्रम लागू हो।
- कमीशनखोरी के लिए पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन सरकार अपने नियंत्रण में ले।
- सभी विद्यालयों में फीस, ड्रेस एवं अन्य वैधानिक वसूली के लिए नियमावली बने।
पीआईएच संस्था ने कहा, सरकार के नियंत्रण में हो पाठ्यपुस्तकों का प्रकाशन
पैगाम इमाम हुसैन सामाजिक संस्था ने भी स्कूलों की मनमानी के विरोध में कलेक्ट्रेट में ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया कि पाठ्यपुस्तकों में कमीशनखोरी रोकने के लिए इनका प्रकाशन सरकार अपने हाथ में ले। स्वदेशी शिक्षा पद्धति विकसित की जाए। मिड डे मील बंद कर पैसा बच्चों के खातों में भेजा जाए और शिक्षकों को वैकल्पिक कार्यों से मुक्त रखा जाए। ज्ञापन देने वालों में हकीम आहिद हुसैन, अब्दुल नफीस अंसारी, शकीलुद्दीन, शाहिद अंसारी आदि मौजूद रहे।
डीआईओएस साहब ट्यूशनखोरी रोकिए एबीवीपी ने कार्रवाई न होने पर किया हंगामा
कॉलेजों में शिक्षकों की ट्यूशनखोरी पर शिकंजा न कसने के विरोध में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को डीआईओएस कार्यालय पहुंचकर हंगामा किया। प्रदर्शनकारियों की मांग पर डीआईओएस ने सभी प्रिंसिपल को आदेश जारी कर दिए हैं कि वह विद्यालयों में ट्यूशन पढ़ाने वाले टीचर्स पर कार्रवाई करें। एबीवीपी के संगठन मंत्री राहुल चौहान के नेतृत्व में तमाम कार्यकर्ता डीआईओएस कार्यालय पर पहुंचे और इस पर नाराजगी जाहिर की कि सत्र शुरू होते ही शिक्षकों ने ट्यूशन को लेकर छात्रों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है।