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छोटा हाथी पर मां दुर्गा अपनी बहन काली से मिलने पहुंची काली मंदिर

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कालीबाड़ी के कालीमाता मंदिर में जुटी भक्तों की भीड़। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली। कोरोना संक्रमण की वजह से मां दुर्गा अपनी बहन काली से मिलने के लिए काली मंदिर पहुंची। हर साल मां दुर्गा जुलूस के साथ आती थीं। इस साल भले ही मेला न लगा लेकिन मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया।
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कालीबाड़ी में मेला लगने की परंपरा सैकड़ों बरस पुरानी है। मान्यता है कि इस दिन बमनपुरी से मां दुर्गा अपनी बहन से मिलने आती हैं और शाम को वापस जाती है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। मां दुर्गा छोटा हाथी पर बहन से मिलने आई और थोड़ी देर रुककर वापस चली गई। इस उपलक्ष्य में मेला लगाया जाता है। जिसके मां काली का शृंगार किया गया और दुर्गा मां के स्वागत में मंदिर को दुल्हन की तरह सजाया गया। बताया जाता है कि बंगाली समाज ने इस स्थान पर मां काली की स्थापना की थी। जिसपर क्षेत्र का नाम कालीबाड़ी रखा गया। तब ही शरद पूर्णिमा से एक दिन पहले मां दुर्गा बहन मां काली से मिलने कालीबाड़ी आती हैं। काली बाड़ी मंदिर में दोपहर को आरती शुरू हुई। इसके बाद मेवा का प्रसाद बांटा गया। इस अवसर पर मंत्री रूप किशोर, संतोष अग्रवाल, अंकुर अग्रवाल, मनीषा, पुजारी पंडित ब्रजेश गौड़ आदि उपस्थित रहे।

मां के लगे जयकारे, दुर्गा जी की प्रतिमा का विसर्जन

बरेली। बड़ी ब्रह्मपुरी में मूंछों वाले हनुमान मंदिर के सामने रज्जन गुरु के आवास पर स्थापित की गई मां दुर्गा की मूर्ति का गुरुवार को रामगंगा तट पर विसर्जन किया गया।
यहां 23 अक्तूबर को मूर्ति स्थापित की गई थी। मूर्ति का निर्माण सुरेश चंद्र कटिहा ने किया। गुरुवार को मोहल्ले की महिलाओं ने दिन में सामूहिक रूप से मां के छंद गाए। मां के जयकारों से पूरा माहौल देवीमय रहा। इसके बाद मूर्ति को कन्हैया टोला से एक अन्य दुर्गा मूर्ति के साथ कालीबाड़ी स्थित मां काली के मंदिर लाया गया। इसके बाद मूर्तियां रामगंगा के तट पर विसर्जित कर दी गईं। यहां मौजूद श्रद्धालुओं ने बताया कि सैकड़ों सालों से यहां मूर्ति स्थापित की जाती रही है। मूर्ति विसर्जन के मौके पर दिनेश, अभिषेक, आशू, प्रदीप शंखधार, अमन, शारदा, विद्या, राकेश, विवेक समेत काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। ब्यूरो

शरद पूर्णिमा आज, रात में रखी जाएगी खीर

बरेली। शरद पूर्णिमा शुक्रवार को मनाई जाएगी। शुक्रवार शाम 5:45 बजे से शनिवार रात आठ बजे तक होगी। रात साढ़े आठ बजे से खीर खुले आसमान में रखी जाएगी। पौराणिक कथाओं में रात में चंद्रमा की किरणों में रखी खीर का भोग मां लक्ष्मी लगाती हैं जिसकी वजह से खीर अमृत तुल्य हो जाती है। शरद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु का पूजन और व्रत रखने से लक्ष्मी जी सुख और ऐश्वर्य में वृद्धि करती हैं। व्रत 31 अक्टूबर को होगा। संवाद
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