आदेश ने दिया ये आदेश
अदालत ने आदेश दिया कि विद्युत निगम मृतक शेर सिंह की पत्नी रूपवती को मुआवजे के रूप में 12 लाख रुपये, मानसिक-आर्थिक क्षति के लिए 50 हजार रुपये अदा करे। इस धनराशि में से आधी धनराशि 6.25 लाख रुपये रूपवती के नाबालिग पुत्र आर्यन के बालिग होने तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में जमा की जाए। शेष 6.25 लाख रुपये में से तीन लाख रुपये रूपवती को नकद दिए जाएं, ताकि वह अपने नाबालिग बेटे का पालन-पोषण कर सके। शेष 3.25 लाख रुपये तीन वर्ष की अवधि के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में जमा किए जाएं।
दूसरे मामले में मृतका रामकुंवर के पति राम भरोसे को दो लाख रुपये मुआवजा, मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए 20 हजार रुपये नकद दिए जाएं। समस्त धनराशि विपक्षीगण एक माह के अंदर रूपवती और राम भरोसे को भुगतान करें। ऐसा न करने की दशा में याचिका दाखिल करने की तिथि से पूरी धनराशि पर सात फीसदी ब्याज भी देना होगा।
ठंड में शाम को नहाकर गीले कपड़े डालने का दिया था तर्क
पीड़ित पक्ष ने अधीक्षण अभियंता ग्रामीण विद्युत वितरण मंडल, अधिशासी अभियंता ग्रामीण विद्युत मंडल प्रथम, उपखंड अधिकारी नवाबगंज, उप निदेशक विद्युत सुरक्षा को पार्टी बनाया था। विपक्षी की ओर से तर्क दिया गया कि नहाने के बाद गीले कपड़े डालने के दौरान हादसा हुआ। ऐसे में विद्युत निगम जिम्मेदार नहीं है।
अदालत ने कहा कि शेर सिंह मजदूरी करता था। ठंड के सीजन में शाम पांच बजे के बाद नहाने की बात तर्कसंगत नहीं है। पीड़ित ने लाइन ठीक कराने के लिए कई बार शिकायत की। अगर उसका घर गलत स्थान पर था तो विद्युत निगम को इसकी शिकायत दर्ज कराकर काम रुकवाना चाहिए था। अदालत ने कहा कि पीड़ित पक्ष मुआवजे का हकदार है।