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Bareilly News: शहर के अधिकतर छोटे-बड़े नाले चोक, बारिश में फिर डूबेंगे कई इलाके

Thu, 13 Jun 2024 05:17 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
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बरेली। मानसून आने वाला है और शहर में अधिकतर छोटे-बड़े नालों की सफाई अभी तक नहीं हो सकी है। ऐसी स्थिति में बारिश होने पर कई इलाके फिर पानी में डूबेंगे। जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ेगा। नगर निगम प्रशासन किसी भी हाल में जलभराव रोकने का दावा कर रहा है, नगर विकास मंत्री के भी निर्देश हैं, लेकिन ये कैसे संभव होगा? इस सवाल का स्पष्ट जवाब किसी के पास नहीं। बड़े नालों की सफाई का टेंडर तो हो गया है, लेकिन साफ-सफाई कागजों में ही चल रही है। हालत यह है कि नालों में कूड़े की मोटी परतें दिखाई दे रही हैं।
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नगर निगम सीमा में करीब 229 छोटे-बड़े नाले हैं। छोटे नालों की साफ-सफाई का जिम्मा नगर स्वास्थ्य विभाग का है। वहीं बड़े 29 नालों की सफाई के लिए टेंडर होता है। इसमें करीब दो करोड़ रुपये के टेंडर की प्रक्रिया नगर निगम के निर्माण विभाग ने की है, लेकिन वह काफी देरी से हुई है। क्योंकि पहले तो निगम ने बीते दो सालों की तरह नालों की खुद सफाई कराने का दम भरा। इसके बाद आचार संहिता के कारण टेंडर न होने की बात कही, फिर तीसरे चरण के मतदान के बाद मुख्य कार्यों के तहत नालों की सफाई के लिए टेंडर कराने की अनुमति निर्वाचन आयोग से ली गई। ऐसे में आचार संहिता खत्म होने से कुछ समय पहले ही टेंडर हुए। पार्षदों का कहना है कि नगर निगम मार्च की शुरुआत में ही निर्वाचन आयोग से अनुमति ले लेता तो नालों की सफाई अभी तक हो चुकी होती और जलभराव की आशंका भी नहीं रहती।
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ढंके हुए नालों की साफ करना ही मुश्किल
शहर में कई इलाकों में नालों के ऊपर पत्थर लगे हुए हैं। कोई भी उन्हें हटवाकर नाला साफ कराने की जहमत नहीं उठाता। इसमें दूल्हे मियां की मजार से चौपुला चौराहे तक व पीलीभीत बाईपास समेत कई इलाकों के नाले शामिल हैं। रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल के अलावा कई घरों के मालिकों ने भी नालों पर पत्थर लगा दिए हैं। इसके कारण इन नालों की सफाई आसानी से नहीं होती।
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कई जगह कनेक्शन न होने से निकासी भी नहीं
शहर के कई नाले ऐसे हैं जिनका निर्माण तो हुआ है, लेकिन नालों को एक दूसरे से जोड़ा नहीं गया है। इसमें खलील स्कूल के सामने जीआईसी नाला, सीतापुर आई हॉस्पिटल के पास का नाला व सर्किट हाउस के पास के नालों समेत शहर के हजियापुर, किला के अलखनाथ मंदिर के पास नाले-नालियों को आपस में जोड़ा नहीं गया है। इससे अधिक दिक्कत होती है।

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इन इलाकों में सबसे अधिक परेशानी
वार्ड 56, 38, 74 से गुजरने वाला टक्कर वाली पुलिया से लेकर बाकरगंज तक के नाले की तीन साल से सफाई नहीं हुई है। इसके अलावा कांकर टोला से गौसिया मस्जिद के सामने वार्ड 53, पनवड़िया वार्ड 40 समेत मालियों की पुलिया, जाटवपुरा, हजियापुर, मलूकपुर, बिहारीपुर, सिटी स्टेशन के सामने, सतीपुर समेत कई जगहों पर नाले में सिर्फ कूड़ा-करकट भरा हुआ। इन जगहों पर ही सबसे अधिक जलभराव की स्थिति होती है।

समय से होगी सफाई, फ्लोटिंग वेस्ट को नालों में न बहाएं: महापौर
महापौर डॉ. उमेश गौतम ने कहा कि नालों की साफ-सफाई के लिए नगर निगम हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन जनता को भी समझना होगा कि नालों में फ्लोटिंग वेस्ट को न बहाएं। अगर पानी पिला रहे हैं, शरबत पिला रहे हैं तो उसके गिलास आदि को कूड़े में डालें न कि नालों में। इसी वजह से नालों पर लेयर जम जाती है। कई बार साफ सफाई में गद्दा, टूटी हुई साइकिल भी मिलती है, इसको रोकना होगा, जिससे नालों का प्रवाह बना रहे। वहीं बरसात से पहले किसी भी दशा में नालों की साफ सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
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