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मस्जिद नहीं हटाएंगे, हाइवे खाली जगह में बनाएं

Sun, 13 Mar 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
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म‌सजिद
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रजा एक्शन कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अदनान मियां ने लभेड़ा में पहुंचकर कहा कि प्रशासन ने हाइवे की जमीन से नूरी मस्जिद हटाने के वारे सोचा तो हर तरफ विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम होगा। 
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लभेड़ा में मस्जिद हटाने के नोटिस मिलने के विरोध में हुई सभा में अदनान मियां ने कहा कि हम मस्जिद अपनी जगह में बनाते है। कोई उसे हटा नहीं सकता। हाइवे बनाने वाली कंपनी के लिए पास मे खाली जमीन पड़ी है। सड़क का चौड़ा करने में उस जगह का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा कि वह इस मसले को लेकर  डीएम ,कमिश्नर समेत अन्य उच्चाधिकारियों से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे। फिर भी प्रशासन जिद पर अड़ा रहा तो विरोध में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शाकिर ने कहा कि नूरी मस्जिद हटाने संबंधी तीन नोटिस भेजने की बात गलत कही जा रही है। दो नोटिस उनको अभी तक नहीं मिले। एनएचएआई का डेढ़ साल पहले एक नोटिस मिला था। वह हाइवे के प्रोजेक्ट मैनेजर से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे। सभा में उस्मान रजा, अब्दुल रजा खां, हलीम रजा, इमरान रजा बरकती सैफ रजा आदि मौजूद रहे।

‘हमारे पास केवल एक नोटिस आया था। हम हाइवे बनाने के लिए मस्जिद के आगे जमीन देने को तैयार हैं। अभिलेख मांगेंगे तो दिखा देंगे।’ मौलाना मोहम्मद शाकिर, इमाम लभेड़ा मस्जिद 
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पीलीभीत बाईपास रोड पर मंदिर, मस्जिद और मजार बनाकर नेशनल हाइवे की जमीन पर प्रतिदिन कब्जे हो रहे हैं। पीपल और बरगद के पेड़ के नीचे पहले देवी देवताओं की मूर्तियां लगाईं गईं, फिर मंदिर और मठिया नुमा छत बनाकर पूजा अर्चना होने लगी। सड़क के किनारे बगल में ही मजार बन गई। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि मजार पर मौलवी सुबह और शाम आकर आने वाले रोगियों का झाड़ फूंक कर इलाज करते हैं। मजार के पीछे नाई ने खोखा रख लिया है। वह उसमें अपना धंधा कर रहा है। दोनों धर्मस्थलों की आड़ में नए खोखे और खपरैल लगाने की तैयारी है।

कृष्णा नगर कालोनी को जाने वाली रोड के कोने पर पीपल और बरगद का पेड़ था। करीब एक दशक पहले बंगाली परिवार आकर अस्थाई रूप से रहने लगा। उसने दोनों पेड़ों के नीचे पवन पुत्र हनुमान, भगवान शिव, दुर्गा, काली समेत अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित कर दीं। कुछ साल पहले बुजुर्ग मां बाप की मौत हो गई तो उनका लड़का गोपाल अपनी पत्नी, दो बच्चों और बहन के साथ आकर रहने लगा। अब मंदिर के पीछे पक्का कमरा भी बन चुका है। पीछे मार्बल की दुकान है। गोपाल सड़क के दूसरी ओर बांस बल्ली लगाकर अपनी सब्जी की दुकान लगाने लगा है। आस-पास के बाशिंदे भी मंदिर में आकर पूजा पाठ करते हैं। 

मंदिर के बगल में ही मजार बनी है। मजार ने हाइवे की ग्रीन बेल्ट की काफी जमीन घेर रखी है। मजार के चारो ओर पक्की दीवारें और सामने लोहे का गेट लगा है जो कि हर समय बंद रहता है। पहले ये कच्ची मजार थी। बाद में धीरे-धीरे ये पक्की बन गई। पड़ोसी दुकानदारों के मुताबिक यासीन नाम के मौलवी सुबह और शाम आकर मजार का गेट खोलते हैं। पहले कोई और आते थे। आने वाले मुतवल्ली बदलते रहते हैं। मजार के अंदर बिजली की लाइन भी है जिससे रात को अंदर रोशनी जगमगाती है। मजार में लाइटें जलाने के लिए कनेक्शन नहीं लिया गया है और न ही कहीं बिजली मीटर लगा है। 
    
‘धर्मस्थलों की आड़ में हाइवे की जमीन पर कब्जे हो रहे हैं। तीन दर्जन से ज्यादा कब्जेदारों को नोटिस जारी किए हैं। कब्जे हटाने के लिए प्रशासन को भी पत्र लिखा है। इस पर निर्णय प्रशासनिक स्तर पर ही लिया जाना है।’ आरएस पुरी, प्रोजेक्ट मैनेजर नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया 
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