परिजनों और रिश्तेदारों के नाम खरीदी संपत्ति
सूत्रों के मुताबिक, दोनों भाई पांच वर्षों से धोखाधड़ी की योजना बना रहे थे। उन्हें आशंका थी कि कंपनी दिवालिया होने वाली है। इस कारण संपत्ति जब्त होने की आशंका में उन्होंने बदायूं और बरेली स्थित संपत्ति को ठिकाने लगाना शुरू कर दिया। इसके बदले उन्होंने नोएडा, गुरुग्राम और अन्य शहरों में निदेशकों ने अपने परिजनों और रिश्तेदारों के नाम से संपत्ति खरीद ली। इसके बाद नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) कोर्ट में योजनाबद्ध तरीके से दस्तक दी। बरेली में सूर्यकांत की कंपनी के निवेशक असमंजस में हैं। एसआईटी नेता के खास गुर्गों की तलाश कर रही है।
कंपनी के प्रबंधन ने धनराशि लौटाने में जताई असमर्थता
अमर ज्योति यूनिवर्स निधि लिमिटेड के प्रबंधन की ओर से मीडिया को डाक से स्पष्टीकरण भेजा गया। इसमें कहा गया कि कुछ निवेशकों ने कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी इलाहाबाद कोर्ट के समक्ष वाद दायर किया है। इस वजह से हम किसी भी निवेशक का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।