बरेली। पशुओं में खुरपका-मुंहपका रोग फिर फैल रहा है। वहीं, थनैला रोग निदान के लिए सटीक पूर्वानुमान जरूरी है। दोनों ही रोगों से पशुओं को सुरक्षित करने के लिए वैज्ञानिक अब नए शोधकार्य करेंगे। इसके अलावा कृत्रिम गर्भाधान के जरिए उत्पादकता बढ़ाने पर भी विशेषज्ञों में सहमति बनी है।
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान इज्जतनगर में शुक्रवार को अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) की 25वीं बैठक में ये निर्णय किए गए हैं। बैठक की अध्यक्षता पूर्व उपमहानिदेशक पशु विज्ञान एवं असम कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. केएम बुजरबरुआ ने की। उन्होंने विदेशों पर निर्भरता कम करने के लिए पशु और कुक्कुट को रोग मुक्त बनाने का सुझाव दिया। साथ ही, उन्नत नस्ल बनाने के लिए भी कहा।
तकनीकी व्यवसायीकरण से 1.95 करोड़ का राजस्व
संयुक्त निदेशक शोध डॉ. एसके सिंह ने बताया कि बीते वर्ष संस्थान ने कुछ नए टीके (चार पीपीआर गोट पॉक्स कंबाइंड वैक्सीन, एफएमडी मार्कर वैक्सीन, पीपीआर मार्कर वैक्सीन, डक प्लेग वैक्सीन) विकसित किए हैं। इन तकनीकी के व्यवसायीकरण से 1.95 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ है। बताया कि वर्ष 2023-24 में 10 एमओयू हुए हैं।
विद्यार्थियों को उद्योगों के साथ काम का मिलेगा मौका
आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि मानव संसाधन विकास, कौशल निर्माण के संस्थान ने 1061 प्रशिक्षणार्थियों को वोकेशनल, सर्टिफिकेट कोर्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। औद्योगिक घरानों से इंटरफेस मीट के तहत अनुबंध की जानकारी साझा की है। इससे विद्यार्थियों को उद्योगों के साथ काम के मौके मिलेंगे। किसानों के हित के लिए चल रहे कार्य भी उन्होंने लोगों से साझा किए।
बैठक में ये भी हुए शामिल
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (पशु विज्ञान) डॉ. अशोक कुमार, गोविंद बल्लभ पंत कृषि प्रौद्योगिकी विवि पंतनगर के कुलपति डॉ. एमएस चौहान, गुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय लुधियाना के डॉ. जेपीएस गिल, प्रकाश फूड्स चेन्नई के अध्यक्ष डॉ. डीवीआर प्रकाश राव भी समिति की बैठक में वर्चुअल शामिल हुए। पीएमई प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ.जी साईं कुमार ने सदस्यों का आभार जताया।