बरेली। समय के साथ कुत्तों और बंदरों का आतंक बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो तीन वर्ष में बंदरों का हमला तीन गुना तक पहुंच गया है। कुत्ते भी दोगुना खूंखार हो गए हैं। इन तीन वर्षों में चूहे, बिल्ली, छछूंदर और सियार के काटने के भी चार हजार मामले सामने आए हैं।
राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक, कुत्ते, बंदर, बिल्ली, सियार, चूहे, छछूंदर व अन्य पशुओं के काटने पर पीड़ित को एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगाई जा रही है।
एआरवी लगाने के दौरान मरीजों को किस प्रजाति के पशु ने काटा, ये भी दर्ज किया जाता है। बीते तीन वर्ष के टीकाकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो बंदरों का हमला तीन गुना तक बढ़ा है। बंदरों का आतंक ऐसे ही बढ़ता रहा तो जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। आईवीआरआई रेफरल पॉलीक्लीनिक के इंचार्ज प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अभिजीत पावड़े के मुताबिक, प्राकृतिक आवास खत्म होने से बंदरों के व्यावहार में परिवर्तन आ रहा है। वे आबादी के बीच रहने लगे हैं। भोजन की तलाश में भटकते हैं। तेज भूख या प्यास लगी हो तो वे हमलावर हो सकते हैं। ब्यूरो