यह अधिक बेहतर रहेगा कि कक्षा दो तक के बच्चों को होमवर्क से आजादी मिले। इसी उम्र से यदि स्कूल के साथ होमवर्क का मानसिक दबाव मिलता है तो बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं। -जूही महल।
सरकार का अच्छा फैसला है। छोटे बच्चों के स्कूल की क्लास के बाद होमवर्क की बजाय कुछ और क्रियात्मक काम दिया जाना चाहिए। जिससे पढ़ाई में उनकी रुचि बढ़े। -एकता पाराशरी।
अभी इसे लागू होने में दो वर्ष का समय है। यह बेहतर साबित होगा। इससे बच्चे रचनात्मकता से जुड़ी चीजों को कर पाएंगे और समझ आधारित शिक्षा का विकास होगा। -वीके मिश्रा, प्रिंसिपल, दिल्ली पब्लिक स्कूल।
अभी तक होमवर्क के लिए नियम तय नहीं थे। किस क्लास से देना है कितना देना है। अब यह स्टडी समय निर्धारित हुआ है। इसका फायदा बच्चों को जरूर मिलेगा। -आरएल सिंह, प्रिंसिपल, महर्षि विद्या मंदिर।
बच्चे किताबी ज्ञान से हटकर समझ आधारित ज्ञान पर अधिक फोकस कर पाएंगे। रटने की बजाए समझना अधिक आवश्यक है। इस पर स्कूलों का फोकस रहता भी है। अब नियम आने के बाद सब ऐसा करेंगे। -डॉ. रामश्री, द्रोपदी इंटर कालेज।विज्ञापन
इसकी अभी ट्रेनिंग चल रही है। होमवर्क भी पाठ्यपुस्तकों पर आधारित नहीं होगा। शिक्षकों को प्रयास करने होंगे कि बच्चों की समझ कैसे विकसित करनी है। इसके लिए हर सप्ताह प्लान पर काम करना होगा। -योहान कुंवर, प्रिंसिपल, विद्या भवन स्कूल।