बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के बाद ही त्रिशूल एयरबेस की सुुरक्षा के लिए मार्च के महीने में बैठक होगी। यह मंगलवार को बैठक होनी थी लेकिन मुख्य सचिव ने मंगलवार को दोपहर 12 बजे तैयारियों के बारे में वीडियो कांफ्रेसिंग से सुरक्षा बैठक तय कर दी। इस कारण अब त्रिशूल की सुरक्षा पीएम के दौरे के कारण दूसरे नंबर पर हो गई है।
वायु सेना के अधिकारियों ने पांच साल पहले 19 फरवरी 2011 को त्रिशूल एयरबेस के आसपास 100 मीटर की परिधि में किसी भी तरह का निर्माण न होने देने के बारे में निर्देश दिए थे। उन दिनों केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए 10 जनवरी 2010 के संशोधित गजट का भी उल्लेख किया गया था। वायु सेना की ओर से कई पत्र भेजे गए लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की। पठानकोट में आतंकी हमले के बाद सेना ने पुराने पत्रों को निकाल लिया है और उन संदर्भों का उल्लेख करते हुए प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी कर ली हैं।
त्रिशूल एयरबेस के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी आरएस समलाल ने पुराने घटनाक्रम का हवाला देते हुए कमिश्नर से कहा है कि यहां की सुरक्षा के लिए पूरी मदद की जाए। केंद्र सरकार के गजट में साफ लिखा है कि पूर्व में 900 मीटर तक किसी भी तरह का निर्माण न करने के आदेश थे। लेकिन इसमें संशोधन करते हुए 10 जनवरी 2010 को यह प्रतिबंध 100 तक कर दिया था। जिसमें 900 मीटर तक के निर्माण के लिए अन्य शर्तें यथावत रखी गईं थीं। जिसकी जानकारी सीधे प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजी गई थी, उसके बाद वायु सेना के माध्यम से 19 फरवरी 2011 में बीडीए और कमिश्नर को उस आदेश पर अमल कराने के निर्देश दिए गए। लेकिन सब कुछ ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
आरसीसी की बाउंड्रीवाल बनेगी
वायु सेना मुख्यालय ने सुरक्षा की दृष्टि से पुरानी और जर्जर बाउंड्रीवाल के स्थान पर एयरबेस के चारो ओर आरसीसी की बाउंड्रीवाल बनाने का फैसला लिया है। इसका निर्माण जल्द ही शुरु हो जाएगा। इस बाउंड्रीवाल का एक मीटर तक नीचे आरसीसी बेस बनेगा। उसके ऊपर भी आरसीसी की बाउंड्रीवाल होगी, जिसकी डिजायन बेंगलूरू से मंगाई जा रही है। जो कि काफी मजबूत बताई गई है। इसके अलावा बाउंड्रीवाल के बाहर पांच से सात मीटर चौड़ी सड़क बनेगी। इस सड़क को बीडीए, नगर निगम तथा अन्य संस्थाओं से बनवाने का अनुरोध किया है। जो कि रात्रि या दिन के समय पेट्रोलिंग में सहायक होगी।