मीरगंज। बारिश में जिले में नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ से निपटने के लिए बृहस्पतिवार को राहत आयुक्त ने अधिकारियों की वर्चुअल बैठक की। इसमें नदी के आसपास रहने वाले क्षेत्र में मॉकड्रिल कराने के निर्देश दिए। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बाढ़ से निपटने के लिए अपनी तैयारियों से रूबरू कराया।
बैठक में राहत आयुक्त के अनुसार यूपी में 44 जिले बाढ़ के लिए अतिसंवेदनशील माने जाते हैं। इसमें 118 तहसीलों के एसडीएम, तहसीलदार, एडीएम वित्त ने प्रतिभाग किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ आने से पहले एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, रेवेन्यू आपदा विभाग के कर्मचारियों के साथ माकड्रिल कराया जाएगा, जिससे आपात स्थिति में बाढ़ से लोगों को बचाया जा सके।
तहसीलदार मीरगंज आशीष कुमार सिंह ने बताया कि जिले में कई क्षेत्र बाढ़ को लेकर अतिसंवेदनशील हैं। मीरगंज क्षेत्र में रामगंगा, दिजोड़ा, बहगुल भाखड़ा, पीलाखार, कुल्ली एवं ढोडा आदि नदियां हैं, जिससे बरसात में बाढ़ की आशंका रहती हैं। इसलिए मीरगंज क्षेत्र में प्रतिवर्ष 14 बाढ चौकियां बनाई जाती हैं। तहसील में एक कंट्रोल रूम बनाया जाता है, जिस पर 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है। अत्यधिक बारिश होने पर प्रशासन गांव में फंसे लोगों को निकालने के लिए नावों की भी व्यवस्था करता है। संवाद
नदियों में पानी कम, प्रशासन अलर्ट
एडीएम वित्त ने रामगंगा नदी क्षेत्र का किया निरीक्षण
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त संतोष कुमार सिंह एवं तहसीलदार मीरगंज आशीष कुमार सिंह ने रामगंगा नदी का गोरा हेमराजपुर व आसपास के गांवों में जाकर निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि अभी नदियों में पानी बहुत कम है, फिर भी सतर्कता के तौर पर प्रशासन अलर्ट है। भूमि कटान और बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए सारी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। एसडीएम मीरगंज तृप्ति गुप्ता ने बताया कि मीरगंज क्षेत्र में अभी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। गांव-गांव राजस्व टीमों को भेजकर जागरूक किया जाएगा। संवाद