मॉकड्रिल के दौरान डमी मरीज
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डॉ. अकीक ने अधिकारियों को उपकरणों के संचालन के लिए स्टाफ के प्रशिक्षण की जानकारी दी। मगर किसी संक्रमित के भर्ती होने पर उनके इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक और उपकरण संचालन के लिए तकनीशियन की कमी के बारे में बताया। एडी हेल्थ ने शासन को भेजी जाने वाली जांच रिपोर्ट में स्टाफ और डॉक्टर की कमी के जिक्र करने की बात कही।
बेड पर मौजूद नहीं थी चादर, नहीं जली लाइट
निरीक्षण के दौरान कुछ बेड पर पुरानी चादरें बिछी हुई मिलने पर एडी हेल्थ ने नाराजगी जताते हुए तत्काल बदलने के निर्देश दिए। एक कक्ष में लाइट नहीं जली। स्टाफ को बुलाकर लाइट ऑन कराने की कोशिश की गई पर कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद सभी आईसीयू पहुंचे और स्टाफ से वेंटीलेटर ऑन करने, उपकरणों को कनेक्ट करने समेत अन्य जानकारियों पर पूछताछ की। कुछ जगहों पर सफाई का अभाव रहा।
ऑक्सीजन आपूर्ति सुचारू, स्टाफ प्रशिक्षित
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तीन सौ बेड के अलावा सीएचसी मीरगंज, राजश्री मेडिकल कॉलेज, रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज, सीएचसी शीशगढ़ बहेड़ी, आंवला, एसआरएमएस में बने कोविड वार्ड का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखीं। सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने बताया कि सभी केंद्रों पर सुविधाएं संतोषजनक मिलीं। कुछ छिटपुट खामियां मिली हैं वह जल्द दूर करा दी जाएंगी। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
दवाओं के लिए काउंटर पर लगी लंबी कतार
तीन सौ बेड अस्पताल में एक ओर अफसर कोरेाना की व्यवस्थाएं परख रहे थे तो दूसरी ओर, ओपीडी में इलाज के लिए मरीजों की कतार लगी थी। दवा वितरण के चार में से दो ही काउंटर संचालित होने से समस्या रही। अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक मंगलवार को करीब नौ सौ मरीज इलाज को पहुंचे थे। इसमें सर्वाधिक वायरल, पेट संबंधी और त्वचा रोग से पीड़ित रहे।