बरेली। महाकुंभ मेले में हादसे के बाद यहां से स्नान करने गए कई श्रद्धालु प्रयागराज में फंसे हुए हैं। वहां से लौटने के लिए ट्रेनें कम होने की वजह से ज्यादातर लोग टेंट में ठहरकर भीड़ छंटने का इंतजार कर रहे हैं। इधर, आशंकाओं से घिरे परिजन बुधवार भोर से ही उनसे संपर्क करने का प्रयास करते रहे। मोबाइल फोन के जरिये बात हुई। परिजनों की सलामती का समाचार पाकर उन्होंने चैन की सांस ली।
नवाबगंज निवासी चिकित्साकर्मी मोहित कुमार प्रयागराज गए हैं। पत्नी पूजा देवी ने बुधवार तड़के उनको कॉल की। पूछा- कहां हैं? मोहित बोले- हादसा सेक्टर-13 में हुआ है। हम सेक्टर पांच में पूरी तरह सुरक्षित हैं। मोहित के साथ बीस लोगों का समूह 27 जनवरी को शाम महाकुंभ में डुबकी लगाने के लिए निकला था। बुधवार को उन्हें लौटना था। भीड़ को देखते हुए अब सभी एक टेंट में ठहर गए हैं।
मोहित के साथ मौजूद नरेश कुमार ने बताया कि भीड़ की वजह से कुंभ क्षेत्र से रेलवे स्टेशन तक आना ही मुश्किल है। ट्रेन में सवार होना और कठिन। टेंट में ओढ़ने-बिछाने के लिए रजाई-गद्दे कम हैं, मगर अब भीड़ छंटने के बाद ही निकलेंगे।
तीन साल की नित्या को नहीं मिल रहा दूध, खिला रहे भंडारे का प्रसाद
सेक्टर पांच में बने अस्थायी टेंट में मौजूद बरेली के लोगों ने बताया कि मेला क्षेत्र में मुनाफाखोर सक्रिय हैं। मंगलवार को दूध 200 रुपये लीटर तक बिका। हादसे के बाद बुधवार को दूध मिला ही नहीं। नवाबगंज के नरेश कुमार और किरन अपनी तीन साल की बेटी नित्या को गर्म पानी पिला रहे हैं। साथ ही भंडारे का प्रसाद खिला रहे हैं। उसे 24 घंटे से दूध नहीं मिला है। क्रांति कुमार की पत्नी अनीता ने बताया कि नौ साल के बेटे यश को दो दिन से दूध नहीं मिल सका है। हादसे के बाद बिस्कुट से लेकर नमकीन तक, अंकित मूल्य से दोगुने दाम पर बिक रहे हैं। फलों के दाम भी आसमान पर हैं।
हादसे से पहले ही निकल आए
भगवान का शुक्र है कि हादसे से पहले स्नान के लिए गए और सुरक्षित निकल आए। -महेंद्र पाल गंगवार, नवाबगंज
हादसे से पहले स्नान करके देवघर के लिए निकल गए। घर से पत्नी ने कॉल कर हालचाल लिया। - अमित गंगवार, नवाबगंज
हादसे से पहले ही हम वहां से पहले निकल चुके थे। भीड़ अधिक होने से हादसा हुआ। - गंगाराम, बिजौरिया रोड
अमर उजाला ब्यूरो