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फीस बुक न मिलने से पैरेंट्स परेशान

Wed, 11 Apr 2018 06:51 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। अधिकांश अभिभावक बच्चों को सिलेबस दिला चुके हैं, जो पिछली बार के मुकाबले काफी महंगा खरीदना पड़ा। मगर अब उन्हें फीस की चिंता है। कुछ स्कूलों ने अब तक फीस बुक नहीं दी है, इसके चलते पैरेंट्स परेशान हैं कि कहीं फीस में भी बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी न हो। अगर बढ़ोत्तरी हो गई तो अब वे स्कूल बदलने की स्थिति में भी नहीं हैं। कुछ स्कूलों की फीस में भारी बढ़ोत्तरी हुई है, इसे लेकर अभिभावक असमंजस में हैं कि जमा करें या न करें, अगर जमा कर दें और फीस कम हो जाए तो उसकी वापसी कैसे होगी।

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एक अप्रैल को रविवार होने के कारण शैक्षिक सत्र दो अप्रैल से शुरू हो चुका है। फीस में बढ़ोत्तरी और महंगे सिलेबस को लेकर अभिभावक परेशान हैं। अमर उजाला की हेल्पलाइन पर फोन करके रोजाना दर्जनों अभिभावक अपनी परेशानियां शेयर कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि निजी स्कूलों की मनमानी के चलते बच्चों की पढ़ाई बहुत महंगी हो गई है और इससे उन लोगों के घर का बजट ही गड़बड़ा गया है। किसी स्कूल ने ड्रेस बदल दी तो किसी ने किताबें। फीस तो हर स्कूल ने ही बढ़ा दी है। पुराने बच्चों से एडमिशन फीस लेने पर रोक है तो उनसे वार्षिक शुल्क, ट्यूशन फीस समेत अलग-अलग मदों के नाम पर मोटी वसूली हो रही है। वहीं कई स्कूल अब भी ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक फीस स्ट्रक्चर ही अभिभावकों को नहीं बताया है जबकि शैक्षिक सत्र शुरू हुए सप्ताह भर से ज्यादा समय बीत चुका है। अभिभावकों को चिंता है कि फीस स्ट्रक्चर देर से मिलने पर उन्हें रुपयों का इंतजाम करने की कम मोहलत मिलेगी। इससे उनकी मुश्किल बढ़ जाएगी, मगर स्कूलों को कोई फर्क ही नहीं है।

लेट फीस अब हर महीने
अधिकांश स्कूल तीन-तीन महीने के स्लैब में फीस लेते हैं। पहले अगर कोई व्यक्ति तीन महीने की फीस पूरा स्लैब बीतने के बाद जमा करता था तो उससे सिर्फ एक बार ही लेट फीस वसूली जाती थी। मगर इस बार कई स्कूलों ने इस नियम में बदलाव कर लेट फीस हर महीने के हिसाब से लागू कर दी है। मान लीजिए अगर किसी व्यक्ति ने पहले स्लैब की फीस जुलाई में जमा की तो उसे तीन महीने की लेट फीस देनी होगी। इसको लेकर भी अभिभावक हलकान हैं। इस संबंध में फरीदपुर के अभिभावक ने वहां के ही स्कूल के खिलाफ शिकायत की है। उनका कहना है कि फीस पहले ही एडवांस में ली जा रही है तो लेट फीस क्यों वसूल रहे हैं।
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बिजली बिल और जेनरेटर मरम्मत की भी बच्चों से वसूली
मॉडर्न विलेज दोहना स्थित स्कूल की शिकायत करते हुए दो अभिभावकों ने कहा कि कक्षा चार और पांच के बच्चों की फीस करीब 25 हजार रुपये है। स्कूल के वार्षिक कार्यक्रम के लिए तक 500 रुपये वसूले जा रहे हैं। स्कूल इस कदर अभिभावकों की जेब काटने पर लगा है कि प्रति छात्र बिजली का बिल और जेनरेटर की मरम्मत के लिए भी 80 रुपये महीने निर्धारित किए हैं। इसके अलावा लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स, टीचर्स वेलफेयर फंड आदि अलग हैं।

अन्य प्रमुख शिकायतें
- सीबीगंज स्थित स्कूल की शिकायत करते हुए एक अभिभावक ने कहा कि दस अप्रैल हो चुकी है, अब तक स्कूल ने फीस बुक नहीं दी है। कितनी फीस जमा करनी है, कुछ पता नहीं है। उनका बच्चा कक्षा चार में पढ़ता है।
- आंवला के अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा आठवीं में आया है। पिछले साल 21 हजार रुपये फीस थी, इस बार 25 हजार कर दी है। लगातार फीस बढ़ा रहे हैं, कैसे खर्चा उठाया जाए।
- बसंत विहार के अभिभावक ने बताया कि बेटा प्रेमनगर स्थित स्कूल में दसवीं का छात्र है। साल भर कह फीस 39 हजार है और अंतिम तारीख 15 अप्रैल बताई है। मंगलवार को असेंबली में अनाउंस किया गया कि सभी बच्चे फीस जल्दी जमा कर दें।
- एक अन्य अभिभावक ने बताया कि स्कूल ने साल भर की फीस में करीब 15 हजार रुपये की बढ़ोत्तरी कर दी है। अप्रैल, मई, जून की फीस जमा करने की अंतिम तारीख 10 अप्रैल बताई है और इसके बाद लेट फीस लगेगी।

ऐसा संभव ही नहीं है। सभी स्कूलों ने फीस स्ट्रक्चर तय कर रखे हैं। एडमिशन के समय जब नए बच्चों की फीस तय होती है तो पुराने बच्चों की भी तय हो जाती है। हो सकता है कि कुछ स्कूलों में प्रिंट होने से रह गया हो, जिसकी वजह से देरी हुई है। वैसे मेरी जानकारी में 95 प्रतिशत तक स्कूल अपनी फीस घोषित कर चुके हैं। बाकी फीस पर दिशानिर्देशों को लेकर हम लोग अध्यादेश के आने का इंतजार कर रहे हैं।
- पारुष अरोड़ा, प्रेसीडेंट, इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन

अभिभावकों को फीस में कमी और प्रशासन को अध्यादेश का इंतजार में
फीस नियंत्रण अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद अभिभावक फीस कम होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं इस पर एक्शन लेने वाले अधिकारी कमिश्नर और डीएम अब भी अध्यादेश आने का इंतजार कर रहे हैं। अध्यादेश के मुताबिक स्कूलों की फीस वर्ष 2015-16 को आधार मानते हुए निर्धारित की जाएगी। सभी मदों को मिलाकर 7-8 फीसदी से ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं की जा सकेगी। नियमों के अवहेलना पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। पहली बार में एक लाख रुपये और दूसरी बार में पांच लाख रुपये जुर्माना वसूला जाएगा। तीसरी बार नियम तोड़े तो मान्यता रद करने का प्रावधान किया गया है।

यह नीतिगत मामला है। फीस नियंत्रण अध्यादेश अभी जारी नहीं हुआ है। हम अध्यादेश का इंतजार कर रहे हैं। जैसे ही शासन से अध्यादेश प्राप्त होगा, इसे लागू कराया जाएगा। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम

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