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सर! नाम पूछकर मुसीबत में मत डलवाएं, प्रशासन से कुछ राहत दिलवाएं

Mon, 02 Apr 2018 06:26 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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स्कूलों की मनमानी से त्रस्त अभिभावक बेहद खौफ में हैं। बच्चों के भविष्य की खातिर स्कूलों की शिकायत करने के लिए सामने आना तो दूर, नाम-पहचान बताने से भी कतरा रहे हैं। रविवार को अमर उजाला की हेल्पलाइन पर 37 शिकायतें आईं। अभिभावकों ने अपनी और बच्चों की समस्याएं हमसे साझा कीं लेकिन डरते हुए। नाम पूछा तो बोले, सर नाम-पहचान पूछकर मुसीबत में न डालिए, प्रशासन से कुछ राहत दिलवाइए। पेट काटकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं लेकिन स्कूल हमारी भावनाओं से खेल रहे हैं। फीस, यूनिफार्म और सिलेबस को लेकर उन्होंने तमाम समस्याएं साझा कीं।
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हेल्पलाइन पर आई शिकायतों से साबित हुआ कि कॉन्वेंट स्कूलों की मनमानी से शहर ही नहीं पूरे जिले में लोग आतंकित हैं। कोई स्कूल द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने को लेकर परेशान है तो कोई सिलेबस और महंगी यूनिफार्म को लेकर। इन सभी लोगों की शिकायतें हमारे पास मौजूद हैं लेकिन उन्हें कोई दिक्कत न हो इसलिए हम उनके नाम एवं नंबर सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं। दरअसल, अभिभावकों का कहना है कि अगर वे खुलकर स्कूल का विरोध करेंगे तो स्कूल वाले उनके बच्चे से भेदभाव तो करेंगे ही, उससे ज्यादा भी कुछ हो सकता है। ऐसे में बच्चों के भविष्य की खातिर उनमें खुलकर स्कूल की मुखालफत में आगे आने की हिम्मत नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर अपनी समस्याएं साझा करने वाले अभिभावक जिला प्रशासन से मदद की दरकार लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि अगर जिला प्रशासन गंभीरता से जांच कराए तो स्कूलों की मनमानी सामने आ जाएगी।

फीस, यूनिफार्म, बुक्स की महंगाई पर डीएम से एक्शन की उम्मीद
अभिभावक स्कूलों की मनमानी को लेकर जिला प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। देवेंद्र पाठक एडवोकेट ने कहा कि फीस, यूनिफार्म और सिलेबस सभी में मनमानी हावी है। स्कूल प्रबंधन हर तरीके से अभिभावकों से ज्यादा से ज्यादा वसूली कर रहे हैं। जिला प्रशासन को स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगानी चाहिए।
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‘‘पेट काटकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं साहब... स्कूल सुनते नहीं’’
अपना दर्द साझा करते हुए एक अभिभावक ने कहा कि वह खुद महज हाईस्कूल तक पढ़े हैं। गरीबी के चलते मां-बाप ज्यादा नहीं पढ़ा सके। मगर वह अपने बेटे को अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते हैं। सात-आठ हजार रुपये महीने की नौकरी है। पेट काटकर बच्चे को पढ़ा रहे हैं। पीलीभीत बाईपास वाले वुडरो स्कूल में बच्चे का दाखिला कराया है। किताबें लेने गए तो कहा कि सिविल लाइंस वाले वुडरो स्कूल से मिलेंगी। वहां जाकर हमने किताबें लेने के बजाय पर्चा ले लिया कि बाजार में सिफारिश करा लेंगे तो कुछ छूट मिल जाएगी। मगर उस पर्चे में पूरी जानकारी ही नहीं थी। बाहर दुकानदार ने कह दिया कि स्कूल से ही खरीदो वरना किताबें वापस करना पड़ेंगी। इसके बाद दोबारा स्कूल पहुंचे तो उन्होंने प्रिंट रेट पर ही किताबें दीं, कोई रियायत नहीं की। इस पर एक्शन जरूर होना चाहिए।

कुछ प्रमुख शिकायतें
- फरीदपुर के सेंट मैरीज स्कूल में हमारा बच्चा नर्सरी से पढ़ रहा है। हर साल ही एडमिशन फीस में दो-तीन हजार रुपये बढ़ जाते हैं। एक्सीडेंट के कारण इस बार कुछ फीस रुक गई तो बच्चे का रिजल्ट नहीं दिया। हमने टीसी मांगी तो वह भी नहीं दी।
- कुतुबखाना के रहने वाले व्यक्ति ने बताया कि उनके दो बच्चे चिक्कर स्कूल में पढ़ते हैं। दाखिले के समय कहा गया था कि एक क्लास में तीस से ज्यादा बच्चे नहीं पढ़ेंगे। अब क्लास में 38 बच्चे हो गए हैं। उन्होंने शिकायत की तो कहा कि 50 बच्चे होने पर दूसरा सेक्शन बनाएंगे। बोले, यह तो धोखाधड़ी की गई है।
- करगैना निवासी व्यक्ति ने बताया कि उनका बच्चा मदर्स पब्लिक स्कूल में पढ़ता है। हर साल फीस में दो सौ रुपये बढ़ा देते हैं। इस बार तो व्हीकल फीस भी 800 रुपये कर दी है। यहां पर फीस बढ़ने के संबंध में एक अन्य व्यक्ति ने भी शिकायत की।
- महर्षि विद्या मंदिर के बारे में शिकायत की गई कि 11वीं में दाखिले के समय कॉशन मनी और ट्यूशन फीस के नाम पर 11900 रुपये लिए गए थे। इस बार बच्चा 12वीं में आया तो 15600 रुपये वसूले गए हैं। बोले, स्कूलों की मनमानी कब रुकेगी।
- द गुरु स्कूल में अपने बच्चे को नर्सरी में एडमिशन दिलाने वाले अभिभावक ने बताया कि 15 हजार रुपये दाखिले में लिए गए हैं। सिंगल ड्रेस एक हजार रुपये की आई है। अभी क्वार्टर्ली फीस भी जमा करनी होगी, जो 6750 है।
- महर्षि विद्या मंदिर के संबंध में ही एक अन्य शिकायत में बताया कि कक्षा नौ में दाखिले के दौरान 15,700 रुपये वसूले गए थे। अब बच्चा हाईस्कूल में आया तो ट्यूशन फीस और वार्षिक शुल्क के नाम पर 13,200 रुपये फिर लिए गए हैं।
- शीशगढ़ से अभिभावक ने शिकायत की, सौरभ जनरल स्टोर पर ही कस्बे के सारे स्कूलों की किताबें मिलती हैं। दुकानदार स्कूलों को मोटा कमीशन देता है। वह इस मामले की प्रधानमंत्री तक शिकायत कर चुके हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।

जिला प्रशासन के पास लगातार शिकायतें बढ़ रही हैं। इनके समाधान के लिए एडीएम (सिटी) को निर्देशित किया गया है। एक-दो दिन में स्कूलों की बैठक बुलाकर पूछा जाएगा कि इतनी मनमानी क्यों हो रही है। अगर वे लोग मानते हैं तो ठीक, वर्ना एक्शन होगा। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
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