ग्रेटर नोएडा। ईकोटेक-3 थाना क्षेत्र के हल्दौनी गांव से 7 जुलाई 2019 में लापता साढ़े तीन साल के मासूम शादाब के परिवार की खुशियां लौटाने में सोशल मीडिया और दो जिलों की पुलिस ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बार शादाब अपने घर में ईद मनाएगा। खास बात यह है कि आरोपियों ने मासूम का अपहरण कर मात्र 90 हजार रुपये में सौदा कर दिया था। जबकि उसकी तलाश में भटक रहे परिवार ने सूचना देने वाले को दो लाख का इनाम देने की घोषणा की थी।
फर्नीचर का काम करने वाले शाहिद अली ने बताया कि शादाब घर के पास लगने वाले बाजार में चला गया था। यहीं अलीवर्दीपुर में खेत किराये पर लेकर सब्जी उगाने वाले राजाराम मौर्य की पत्नी चिंता देवी सब्जी बेचती थी। राजाराम की फुफेरी बहन मिथलेश की दो बेटियां थीं, लेकिन कोई बेटा नहीं था। मिथलेश का पति राजेंद्र शाक्य लड़के की भी चाह रखता था। चिंता देवी ने उन्हें बेचने के लिए शादाब को बहला-फुसलाकर अगवा किया था। राजाराम ने साजिश रचकर मासूम को 90 हजार रुपये में राजेंद्र को बेच दिया। इसके बाद से राजेंद्र और उसके परिवार ने शादाब का नाम बदलकर अंश रख दिया और उसे अपना बेटा बताकर पालन पोषण करने लगे। कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वायरल लापता की तलाश की सूचना पर एक शख्स ने बच्चे का फोटो देखकर परिजन से संपर्क कर सूचना दी कि उनके बेटे जैसा दिखने वाला बच्चा बदायूं के कादर चौक क्षेत्र में एक परिवार के पास है। परिजन ने वहां पहुंचकर बच्चे की पहचान की और ईकोटेक-3 थाना व बदायूं पुलिस को दी। आरोपी राजेंद्र और राजाराम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। आरोपी महिला चिंता देवी की तलाश की जा रही है।
फोटो से नहीं वीडियो दिखाई तो पहचाना
शाहिद ने बताया कि शादाब के पास पहुंचे तो वह उन्हें नहीं पहचाना, क्योंकि घटना को लगभग पौने दो वर्ष बीत चुके थे। उसे उसकी बहनों व परिवार के साथ फोटो दिखाए तब भी वह नहीं पहचाना। हालांकि वीडियो दिखाने पर वह पहचान गया।
कई दिन से लगे थे मुखबिर, तब जाकर मिला बालक
कादरचौक (बदायूं)। कई दिन तक मुखबिर लगे रहे। वह इस कोशिश में रहे कि किसी तरह बालक का एक फोटो मिल जाए। जैसे-तैसे उन्होंने फोटो लिया, तब कहीं पुलिस बालक तक पहुंची। नोएडा पुलिस की मानें तो करीब एक सप्ताह पहले से उन्होंने गंगी नगला के आसपास अपने मुखबिर लगा दिए थे। लेकिन इन मुखबिरों को बच्चे तक पहुंचना आसान नहीं था। कई दिन तक वह फेरी वाला बनकर गांव के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने कोशिश करके बच्चे का एक फोटो लिया। यही फोटो परिवार वालों को भेजा गया। उनके अलावा पुलिस भी कादरचौक इलाके में डेरा जमाए रही। थाना पुलिस को तब पता चला, जब उन्होंने सबसे आखिर में गंगी नगला में जाकर दबिश दी। आखिरकार मासूम शादाब अपने घर पहुंच गया है। संवाद