सिरौली/रामनगर। पशुधन एवं दुग्ध मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि लोग तालाब, नहर, नालों पर कब्जा कर रहे हैं। पेड़ों को लगाने के बजाए काट रहे हैं। दूध दूहकर गायों को छुट्टा छोड़ रहे हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। यह समस्त मानव जीवन के लिए खतरा है। यह विचार उन्होंने गांव लीलौर में महाभारतकालीन झील के पुनरुद्धार शिलान्यास कार्यक्रम में व्यक्त किए।
यहां सर्वप्रथम मंत्री ने पूजन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके तहत सिंचाई विभाग ने ट्यूबवेल लगाने के लिए बोरिंग का काम शुरू करा दिया है। मंत्री ने झील के विकास में आर्थिक सहयोग के लिए 29 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने उपस्थित जनसमूह, ग्राम प्रधानों, दानदाताओं से झील के विकास में जो बने, सहयोग दें और साथ कारसेवा भी करें। मंत्री ने कहा कि यह झील ही नहीं यक्ष सरोवर भी है। अब उनकी इच्छा आंवला को पर्यटन का हब बनाना है। वह शीघ्र रामनगर किला को भी पर्यटन स्थल के रूप में परिवर्तित कराने का कार्य करेंगे।
इस मौके पर सांसद छत्रपाल गंगवार, नबाबगंज विधायक डॉ. एमपी आर्य, बिथरी चैनपुर विधायक राघवेंद्र शर्मा, भाजपा आंवला जिलाध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह चौहान, मझगवां ब्लाॅक प्रमुख यशवंत सिंह, आंवला के पूर्व चेयरमैन संजीव सक्सेना आदि मौजूद रहे। संवाद
यक्ष सरोवर को पर्यटन में दिलाया जाएगा अलग पहचान : डीएम
सिरौली। डीएम अविनाश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना में लीलौर के महाभारतकालीन यक्ष सरोवर को चुना गया है। इस स्थल को इस कदर रमणीक बनाया जाएगा कि लोग नैनीताल एवं अन्य स्थानों की तर्ज पर झील पर घूमने आएंगे। इसके लिए बरसात के अलावा हर समय लबालब पानी की व्यवस्था के लिए चार पंपों की स्थापना होगी। 840 बीघा में स्थित झील पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए पिकनिक स्पॉट बनेगा, जिसमे स्टीमर, वाटर बाइक, वाटर स्पोर्ट्स की व्यवस्था होगी। चौतरफा पेड़ों को लगाया जाएगा। लाइट व्यवस्था के अलावा पर्यटकों को ठहरने के लिए झील की खाली भूमि पर गेस्ट हाउस और कैंटीन का निर्माण कराया जाएगा। इससे अधिक संख्या में पर्यटक आएंगे, जिससे क्षेत्र में विकास के अवसर बढ़ेंगे। संवाद