बरेली। बिजली सुधार के लिए होने वाले कार्यों में बड़ा खेल सामने आया है। पिछले तीन साल में सौ करोड़ रुपये का काम विद्युत कार्य मंडल ने कराया है लेकिन तमाम लाइनें सिर्फ कागजों में ही खींच दी गई हैं। उपकेंद्रों का निर्माण भी मानकों पर खरा नहीं है। यही नहीं बचा सामान कहां गया इसका भी पता नहीं। विभाग को भी जब इस गोलमाल की भनक लगी तो ठेका फर्मों से वसूली का नोटिस जारी किया गया है।
विद्युत कार्य मंडल कार्यालय सिविल लाइंस में संचालित हैं। यहां से पूरे मंडल में नए स्टेशन बनाना, क्षमता वृद्घि, नयी लाइनें बनाना, ट्रांसफार्मर आदि लगाना, पुरानी एचटी लाइनें बदलना आदि कार्य संपन्न होता है। तीन सालों में सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए। भुगतान भी कर दिया गया। सुगबुगाहट मिली कि बचा हुआ सामान गायब कर दिया गया है। शिकायत यह भी हुई कि मानकों का पालन नहीं किया गया है। तब विभाग को होश आया। अब मीरगंज के भारत इलेक्ट्रिकल्स, एमए इलेक्ट्रिक्स आंवला, तिवारी ट्रेडिंग कंपनी बदायूं समेत दर्जनभर ठेकेदारों को नोटिस जारी कर वसूली की तैयारी की जा रही है।
इस्टीमेट से कम बनी लाइनें, भुगतान पूरा
विभाग स्वीकृत इस्टीमेट अनुसार ठेकेदारों को एचटी लाइन और उपकेंद्र बनाने हेतु सामान आदि सौंपता है। ज्यादातर ठेकेदार शार्ट लाइनें बना कर भारी मात्रा में कीमती तार और खंभे आदि बचाते हैं। जो खुल बाजार में बेच दिया जाता है। तैयार लाइनों का भौतिक सत्यापन ही नहीं होता है। इससे ठेकेदार मौज में रहते हैं।
.... और कम बना दी लाइनें
नाम लाइन स्वीकृत दूरी/ किमी
शाहजहांपुर में बड़ा गांव- बंथरा 20
पूरनपुर- शेरपुर 9
आंवला उपकेंद्र 36
बड़ा गांव- पुवायां 6
रिछा में लाइन बदलना 10
देवरनियां में लाइन बदली 10
नोट: स्वीकृत दूरी से सभी में लाइनें कम बनाने की शिकायते हैं।
निर्माणाधीन सन सिटी विस्तार उपकेंद्र का कार्य करने वाले ठेकेदार ने दो किलोमीटर भूमिगत केबल गायब कर दी हैं। इसकी कीमत तीस लाख रुपये बताई जाती है। चौपुला-सुभाषनगर मार्ग चौड़ीकरण कार्य में करीब 35 लाख रुपये का सामान का कुछ अतापता नहीं है। शिकायत होने पर खलबली मची हुई है। कुंआटांडा, शेरपुर कलां, बिल्सी में हुए कामों में भारी गोलमाल है। मीरगंज उपकेंद्र पोषक लाइनों में ठेकेदारों ने निम्न स्तरीय 20 किलोमीटर तार लगा दिया है। इससे 15 लाख रुपये का चूना लगा।
नए उपकेंद्र खतरे से भरे
नए उपकेंद्र खतरे से खाली नहीं हैं। विभागीय मिलीभगत से उपकेंद्राें पर अर्थिंग जैसा महत्वपूर्ण भी ईमानदारी नहीं हो रहा है। करीब चार टन लोहा विभाग अर्थिंग कार्य से इश्यू करता है, जबकि मौके पर तीन टन भी नहीं लगता है। इस तरह हर उपकेंद्र पर एक लाख रुपये से ज्यादा कीमत का लोहा आसानी से ठेकेदार हड़प लेता है।
‘लाइनें शार्ट बनाने, केबल चोरी और मानक के अनुरूप अर्थिंग नहीं होने की ज्यादा जानकारी मुझे हैं, कुछ मामले मेरे संज्ञान में आए हैं। ठेकेदारों से धनराशि और सामान जमा कराने के प्रयास हो रहे हैं।’
- राजेंद्र प्रसाद, एसई, विद्युत कार्य मंडल